गोरक्षशतकम् (गुरु गोरखनाथ - षडङ्ग हठयोग, कुण्डलिनी एवं प्राणायाम विधान सटीक)
Goraksha Shatakam of Guru Gorakhnath with Commentary
गुरु गोरखनाथ (टीकाकार: पं. मोतीलाल खद्दर शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ९ ) ★ शुभम् भवतु ★ आचार्य 'प्रणव' वानप्रस्थी, डॉ. इच्छाराम द्विवेदी अध्यक्ष, पुराणेतिहास विभाग, श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठम्, नई दिल्ली पीताम्बराचरणपङ्कज चञ्चरीकः लेभे मुदं “प्रणव” संज्ञक एष लब्ध्वा । गोरक्षनाथ रचितम् शतकम् पवित्रम् यत्सानुवाद मतिसुन्दरम द्वितीयम् ।। मोतीलाल विबुधामृत बोधयुक्तम् भाषानुवादमखिलम् बहुशः पठित्वा । आशंसते मम मनः शुभमस्तुनित्यम् गोरक्षनाथ कृपया विबुधस्य तस्य ।। पीताम्बरा पद परागपवित्र देहो यो मन्त्र-तन्त्र-निगमागम-पूतचित्तः । मोतीलाल “शुचि” नामधरो महात्मा योगीश्वरोऽस्तु भुवि साधनचक्रवर्ती ।। निखिल ब्रह्माण्ड वैभवविस्तारिणी चराचर जगतपालनी सकल- पापक्षयकारिणी, भवसागर सन्तारिणी, शत्रुस्तम्भनकारिणी, हरिद्रासरोवर विहारिणी मातृ श्री पीताम्बरा जगदम्बा के चरणारविन्दयुगल में नित्यनिवास से परिवृतान्तःकरण, अनन्त श्री विभूषित, योगीसम्राट पूज्य चरण सद्गुरुदेव राष्ट्रगुरु श्री के अमोघ आशीर्वाद से आप्लावित साधक श्रेष्ठ श्रीयुत डॉ. मोतीलाल खड्डुर शास्त्री (मास्टरजी) द्वारा अनुवादित श्री गोरक्षशतकम् को देखकर अत्यन्त उल्लास हुआ। जैसा महायोगी श्री गोरक्षनाथजी का योगशतक अद्वितीय है वैसाही सुन्दर अनुवाद भी आचार्यवर्य ने किया है। एतदर्थ मैं उनको सहृदय से साधुवाद देता हूँ।