भारतकोश
गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण

गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण

Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman

राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा

स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished78 पृष्ठ

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यहाँ विद्या, कला, कौशल, शौर्य एवं पराक्रम की शिक्षा से प्रशिक्षित कर बच्चों के जीवन को संस्कारित किया जाता है। प्रतिभासम्पन्न विद्यार्थी अपनी योग्यता को अपने जीवन का मूलाधार बनाता है। यहाँ ऋषि परंपरा के अनुसार, बिना किसी सरकारी योग्यता प्रमाणपत्र के विद्यार्थियों को शिक्षित किया जाता है।

शिक्षा ऐसी हो जो राष्ट्रीयता का बोध कराए, राष्ट्र प्रेम का पाठ पढ़ाए, ऐसा न हो कि इन महत्वपूर्ण तत्वों को जीवन से विलुप्त कर दिया जाए। मुख्यतः हमारी शिक्षा मस्तिष्क, हाथ, और हृदय तीनों अवयवों का समग्र विकासोन्मुख शिक्षा-प्रणाली होनी चाहिए। जो गुरुकुलीय शिक्षा-प्रणाली ही दे सकती है। शिक्षा कला-कौशल एवं पराक्रम से परिपूर्ण हो, जीवन के लिए मोक्ष साध्य होनी चाहिए। “सा विद्या या विमुक्तये” की भावना से ओतप्रोत हो।

गुरुकुलम् में भोजन – व्यवस्था

गोबर के कंड़े और लकड़ी के चूल्हें पर भोजन पकाया जाता है। बारिश का पानी भोजन बनाने एवं पीने में उपयोग किया जाता है। भोजनालय में पीतल व मिट्टी के बर्तनों में भोजन पकाया जाता है। कहा जाता है कि जैसा आहार वैसा विचार और जैसा अन्न वैसा मन।

यहाँ पर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक साधन का कम से कम उपयोग किया जाता है। फ्रीज, ओवन, कुकर, गैस आदि का उपयोग नहीं होता है।

अतः विद्यार्जन के साथ-साथ में विद्यार्थियों के आहार पर भी विशेष ध्यान रखा जाता है। भोजनालय एवं संपूर्ण गुरुकुल के प्रांगण में गोबर और मिट्टी से लिपाई पोताई द्वारा स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है। भोजनालय में आसन पर बैठा कर चौकी के ऊपर थाली रख कर पित्तल-कांस्यपात्र में भोजन कराया जाता है। आरोग्य शास्त्र, धर्मशास्त्र, और नीतिशास्त्र की दृष्टि से भोजन बैठकर का करने का विधान है। कारण है कि आरोग्य का मूल आधार हम कैसा