गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण
Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभोजन करते हैं और कितना भोजन ग्रहण करते हैं और कैसे पचा सकते हैं इसी के ऊपर रहा है। अतः योग्य आहार, योग्य समय में और योग्य पद्धति से ही लेना चाहिए। अधिकतर रोग पाचन तंत्र के कमजोरी से ही होते हैं। खड़े-खड़े भोजन करने से पाचन तंत्र निर्बल होता है। आहार का पाचन प्राण वायु की गति बैठकर भोजन करने से जठराग्नि की तरफ होने से पाचन क्रिया सही होती है। लकड़ी के चूल्हे पर बनाया हुआ भोजन अत्यंत स्वादिष्ट होता है। भोजनालय में रासायनिक वस्तुओं का उपयोग नहीं होता है। किसी भी प्रकार का रंग, नींबू का फूल, बेकिंग पाउडर जैसी वस्तुओं का उपयोग नहीं होता है, शाक भाजी से लेकर अनाज तक सभी खाद्य वस्तुएँ जैविक विधि से उपजायी हुई प्रयोग में लाई जाती है। भोजन सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त से पहले कराया जाता है जो पूर्ण वैज्ञानिक है। प्रत्येक विद्यार्थियों को प्रतिदिन सुबह भारतीय गायों का उष्णोधर दुग्धपान
यह गुरुकुलम् मूल रूप से प्राचीन शिक्षा-व्यवस्था को पुनस्थापित कर भारतीय संस्कृति, परंपरा को अक्षुण्ण बनाने तथा सम्पूर्णतया भारत पूर्णोदय की तरफ अग्रसर हैं।
हमारा संकल्प शिक्षा द्वारा भारत का पुनर्निर्माण का है। जो मुख्य रूप से गरीबी एवं महंगाई से, बेकारी और बीमारी से, भय और भ्रष्टाचार से, दुर्व्यसन और हिंसा से मुक्त भारत का निर्माण करें।
सारस्वत चूर्ण के साथ (जिससे बालक मेधावी और प्रतिभा सम्पन्न होता हैं) कराया जाता है। प्रतिदिन स्थानीय लोगों को निःशुल्क छाछ का वितरण किया जाता है। सदैव ऋतु अनुकूल एवं आयुर्वेदिक नियमों को ध्यान में रखते हुए भोजन की व्यवस्था की जाती है। भोजनोपरान्त पाठशाला की बर्तनों की सफाई उपलों के राख द्वारा की जाती हैं।
आधुनिक परिवेश में शिक्षा का भारतीयकरण हो इस उद्देश्य के साथ वर्षों से विद्वज्जन, संस्था, संगठन अपने-अपने कार्यक्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।