गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण
Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंकारखाने बढ़ते गए, ग्राम्य उद्योग टूटते चले गये, जानवर कटते रहे, शिक्षार्थियों और विद्यार्थियों की तादात बढ़ती गई, परंतु सभी का समावेश हो सके, उसके लिए पर्याप्त शालाएँ नहीं बना सके। उन्हें शिक्षा देने के लिए आवश्यक योग्य शिक्षक भी तैयार न कर पाए। परिणामस्वरूप शालाएँ मानो औद्योगिक फैक्ट्रियाँ हों, इस प्रकार उनमें पहली पाली, दूसरी पाली, तीसरी पाली की रचना कर शालाओं के गौरव को खत्म कर दिये।
अंग्रेज इतिहासकार का प्रमाण
अंग्रेज इतिहासकार लडलॉन ‘भारत का इतिहास’ नामक अपनी पुस्तक में जिक्र करता है कि – ‘जिस गाँव में पुराना संगठन (पंचायतें) टिका हुआ है वहाँ प्रत्येक बालक लेखन, पठन और गणित कार्य अच्छी तरह जानता हैं लेकिन जहाँ-जहाँ हमने पंचायतों को बर्बाद किया है वहाँ ग्राम पंचायतों के साथ शालाओं का भी विनाश हो गया हैं। वहाँ बच्चों की लेखन, पठन और गणित कार्य सीखने की सुविधाएं नष्ट हो गई हैं।’
भारत पर विजय पाने से पूर्व अंग्रेजों ने हमारी समाज व्यवस्था, अर्थ व्यवस्था, शिक्षा व्यवस्था, राज्य पद्धति, युद्ध पद्धति, धार्मिक व्यवस्था, प्रजा के रीति रिवाज, वैद्यकीय व्यवस्था, कृषि यातायात व्यवस्था आदि तमाम प्रकार के विषयों का भिन्न-भिन्न अधिकारियों द्वारा अध्ययन किया कराय़ा था। हमारी