गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण
Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
पृष्ठ 32, कुल 78 में से
संदर्भ में पढ़ेंइन तमाम व्यवस्थाओं को कैसे तहस-नहस कर दी जाए, समग्र राष्ट्र पर अधिकार प्रभुत्व स्थापिक कर इस देश की अपार सम्पत्ति का किस प्रकार शोषण किया जाये और समूची प्रजा कैसे ईसाई बना दी जाए, उसकी व्यवस्थित योजनाएं तैयार की गई थीं। इन योजनाओं के षडयंत्रों में हम फंस गए और हमारी अधोगति हुई।
क्यों सबको एक ही शिक्षा?
एक विश्व की रचना में तथाकथित देशी अंग्रेजों का सहयोग
अंग्रेज यहाँ से विदा हुए इससे पूर्व अंग्रेजी शिक्षा द्वारा जिन तथाकथित अंग्रेजों को तैयार करते गए, उनके हाथों हमारे धर्म, संस्कृति, समाज व्यवस्था आदि का सत्यानाश बड़ी तेजी से होता जा रहा हैं। भारतीयों को यथाशीघ्र, शराब, मांसाहार और विदेशी रहन-सहन के प्रति प्रवृत्त किए जाते हैं, जिससे उनका ‘One World’ यानी ‘एक ही विश्व’ (गोरोँ का राज्य) और ‘One Religion’ अर्थात् ‘एक ही धर्म’ (ईसाई धर्म) का स्वप्न पूरा हो पाए। ‘One World’ यानी किसी एक ही सत्ता का समस्त विश्व पर शासन नहीं, लेकिन वर्तमान युग की बदली हुई परिस्थिति में विश्व बैंक तमाम अश्वेत प्रजाओं पर, सहायता के नाम पर कर्ज का बोझ लाद कर अपना प्रभुत्व जमा दे। अर्थात् एशिया और अफ्रीका की तमाम प्रजाओं पर विश्व बैंक का प्रभुत्व स्थापित हो जाए। गोरी ईसाई राज्य सत्ताएँ इस विश्व बैंक की साझेदार हैं। विश्व की तमाम अश्वेत प्रजाओं पर प्रभुत्व स्थापित कर उनके ‘One World’ यानी ‘एक विश्व’ राज्य के लक्ष्य के प्रति बड़ी तेजी से गति किये जा रहे हैं।