भारतकोश
गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण

गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण

Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman

राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा

स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished78 पृष्ठ

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शहरों ने, शहरीकरण की प्रवृत्ति ने परंपराओं को तोड़ने की कोशिश जरूर की है, लेकिन हमारी सामाजिक व्यवस्थाओं ने कम से कम गांवों में तो उन्हें अभी थामे रखा है। इसका हमें गर्व होना चाहिए, परंतु यह भी सच है कि गाँवों से बड़ी तादाद में शहरों की तरफ पलायन हो रहा है, हजारों की संख्या में बेरोजगार युवक नौकरी की तलाश में रोजाना शहरों की ओर कूच करने लगे हैं, इसके लिए सरकारी नीतियाँ जिम्मेदार है, तो हम स्वयं भी उतने ही जिम्मेदार हैं, समाज ने अपनी आवश्यकताएं, पसंद- नापसंद, इच्छाएं-अनिच्छाएँ, सभी शहरों के समान ढालने शुरू कर दिए, अपने संसाधनों की अनदेखी कर, अपने कौशल को तुच्छ समझ कर हम नौकरी पर आश्रित होने लग गए हैं।

गाँव के लोहार का बेटा अगर स्कूली पढ़ाई के साथ-साथ अपने दादा और पिता से उनके हुनर के कुछ राज समझता है, उन्हें काम करते हुए देखता है, उन्हें सुनता है और कभी-कभी हाथ बटाता है तो यह कोई तथाकथित बाल-श्रम के कानून में नहीं आता, यह तो वांछित है, होना ही चाहिए, गलीचे बनाने वाले किसी परिवार के बच्चे अगर उस खानदानी पेशे में शुरू से ही दिलचस्पी लेने लगते हैं तो क्या वे वर्तमान, दिशाहीन स्कूली शिक्षा से बेहतर शिक्षा प्राप्त नहीं कर रहें होते?

चरखा स्वयं एक कीमती मशीन है, हाथ कताई ही दरिद्रता को भगाने का और धन के अभाव को असंभव बनाने का एक मात्र सुलभ उपाय है। - गांधी जी