गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण
Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
पृष्ठ 41, कुल 78 में से
संदर्भ में पढ़ेंयदि सत्रे मन से शुद्ध हृदय से मानवजाति को संकटपूर्ण स्थिति से उबार कर विश्व को शांति और कल्याणकारी, मंगलमयता प्रदान करना है, तो भारतीय ऋषि-मुन-महात्माओं द्वारा मोक्ष चार पुरुषार्थों की सनातन संस्कृति को आत्मसात् करना होगा। जिसके आधार पर यह विश्वशांति, मानवता का कल्याण एवं मंगलमय स्वरूप टिका हुआ है, यह शाश्वत सत्य हैं।
भारत में एक बहुत बड़ी क्रान्ति शुरू हुई है कि गुरुकलों का पुनः प्रस्थापन युगानुकूल रूप में हो रहा है।
क्योंकि जहाँ पर सर्वांगीण और समग्र शिक्षा मिलेगी वही पर बच्चा आगे जाएगा।
जब तक समाज शिक्षा का दायित्व अपने हाथ में नहीं लेता, सरकार चाहकर भी परिवर्तन नहीं कर सकती।
स्वाभिमान और समृद्धि की कुंजी है
स्थानीय संसाधन और स्थानीय कौशल - अतुल जैन
(लेखक दीनदयाल शोध संस्थान के सचिव हैं, लेकिन इस लेख में उनके विचार निजी हैं।)
पूरे विश्व में इस समय हाहाकार मचा हैं, मंदी का एक भंयकर दौर चल रहा हैं, पश्चिम की सभी अर्थव्यवस्थाएँ एक-एक कर इस दल-दल में धंसती चली जा रही है। अपना देश अगर अभी तक इस भयानक परिस्थिति से बचा हुआ है तो सिर्फ इसलिए कि वैश्वीकरण की चकाचौंध के बावजूद उसका एक बहुत बड़ा वर्ग अभी अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है और इसके अधिष्ठान में है, हमारे किसान, हमारे कारीगर, हमारी परिवार व्यवस्था और परंपराओं में हमारी आस्थआ व उनके प्रति हमारा प्रेम। ये परम्पराएँ सिर्फ सामाजिक स्तर पर ही नहीं, आर्थिक रूप से भी हमें मजबूत बनाए हुए हैं।