गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण
Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंउन्मुख नहीं बना पाए। देश में जगह-जगह पर होने वाले कौमी दंगे इसके सबूत हैं। स्वाधीनता के पन्नीस सालों तक जो राष्ट्रीय भावना थी उसका बहुत जल्द वाष्पीकरण हो गया और उसके स्थान पर प्रादेशिक भावना बलवती होने लगी हैं। राष्ट्रीय एकता को हड़प कर लेने वाली इस स्थिति का कारण है- अंग्रेजों द्वारा लिखित भारत का बेहद झूठा, आधारहीन परिकथाओं जैसा कल्पित इतिहास। इस इतिहास ने विभिन्न कौमों और प्रान्तों के बीच वैमनस्य पैदा किया है। इसी जहर के कारण प्रत्येक राज्य में और केन्द्र में भी कुर्सी-युद्धों का अंत नजर नहीं आता।
यह परिस्थिति किसी भी सयाने आदमी को चिंतित बना दे ऐसी हैं।
ग्रामीण बच्चों को डिग्रियों के पीछे न दौड़ाएं
ग्रामीण बच्चों का अधिकांश वर्ग किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण कारीगरों द्वारा बना हुआ है। उन्हें अपने पैतृक धंधे करने होते हैं। इन धंधों को छोड़कर व उन उपाधियों के पीछे दौड़ेंगे तो बेकारी का बोलबाला हो जाएगा और कृषि, पशुपालन और ग्रामीण उद्योग नष्ट हो जाएंगे, जो अंधेरगर्दी में परिणत हो सकता है और राष्ट्र की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। राष्ट्र को पालने, पोषने और प्रजा की जीवन-जरूरतें पूरी करने का कर्तव्य इन बच्चों को ही निभाना होगा। इस कार्य में उन्हें कॉलेज की उपाधियाँ किसी काम में की नहीं आती।
उन्हें कृषि और पशुपालन सीखना हो तो B.Ag. या Veterinary Surgeon की उपाधि लेने की कोई आवश्यकता नहीं हैं।