गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण
Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंउद्योग बेकारी दूर करने में सहायक नहीं बन पाए हैं।
हमारा देश आजाद हुआ, तब देश में 40 लाख लोग बेकार थे। उसके बाद लोगों को रोजगार देने के नाम पर 14,916 करोड़ रूपयों की लागत से कारखाने बनाए गए। बेकारों की संख्या 40 लाख से बढ़कर 4 करोड़ तक पहुँच गई। इन फैक्ट्रियों में मानव संसाधन पूरा करने के लिए समग्र प्रजा पर शिक्षा का राक्षसी और निर्थक बोझ डाला गया। देश के लाखों आशावान् युवकों को आज भी हताश बनाकर बेकारी, बीमारी, अपराध और मंहगाई से पीड़ित समाज में धकेल दिया जाता है।
बढ़ती हुई बेकारी के इस प्रवाह का कारण जनसंख्या वृद्धि बताकर आत्म-प्रवंचना करना सरकार का पुराना शगल है। क्योंकि आबादी में बढ़ावा 50 प्रतिशत है जबकि पब्लिक सैक्टर के ही औद्योगिक कारखानों में पूंजी लगाने का वृद्धि प्रमाण 358 प्रतिशत और बेकारी की वृद्धि 900 प्रतिशत है।
और, फिर वर्तमान शिक्षा द्वारा प्रजा के चारित्र्य का स्तर भी ऊँचा नहीं उठा है। भ्रष्टाचार और सामाजिक अपराधों में जिस प्रकार लगातार वृद्धि होती जा रही है, वह हमारी नैतिक गिरावट की सूचक हैं। बेकारी बेहद बड़ी है। जो वर्ग मानसिक रूप से भारत विरोधी था, उसके दिमाग को हम भारत-