गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण
Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंपाँचवी कक्षा तक पहुँचते पहुँचते ही 513 लाख बच्चों को पढ़ाई छोड़कर मजदूरी के लिए भटकना पड़ता है। यह प्राप्त नहीं होती तो अधिकतर संख्या बेकार होकर पूरक मजदूरी की खोज में भागदौड़ मचाती रहती है। थोड़े से लोग समाजविरोधी प्रवृत्तियों में भी लग जाते हैं।
A photograph showing a group of children, some carrying large sacks on their heads, standing in front of a large orange truck. The children are dressed in simple, worn clothing. The ground is dusty and uneven. The truck is a large commercial vehicle, likely used for transporting goods. The scene depicts the harsh reality of child labor in India.
शिक्षा क्षेत्र के इस षड्यंत्र को बंद करें।
शिक्षा के इस समूचे षड्यंत्र पर रोकथाम लगाकर, यदि इसमें परिवर्तन न लाया गया तो भयानक परिस्थिति से देश बर्बाद हो जाएगा। 1853 में अंग्रेजों को अनपढ़ भारतवासियों की ओर से जो खतरा महसूस हो रहा था, वही खतरा अब अर्धशिक्षित भारतवासी देश की सुरक्षा के लिए पैदा कर रहे हैं।
हम ऊपर देख चुके हैं कि चौथि पंचवर्षीय योजना में शिक्षा पंचवर्षीय योजना में शिक्षा के लिए 7 अरब रुपये अलग निकाले गए थे, जबकि उद्योगों में 1671-72 तक, सार्वजनिक क्षेत्र में कारखाने खड़े करने के पीछे 552 अरब रुपये लगाए गए, जबकि निजी क्षेत्र में 9864 करोड़ रुपयों की लागत से 13084 फैक्ट्रियाँ स्थापित की जा चुकी थीं, जिनके पीछे केवल 41 लाख लोगों को रोजगार मिला।
देश में 5,75,721 गाँव हैं, उनमें 3,18,1611 गाँवों में 500 से भी कम आबादी है। 1,32,873 गाँवों में 1000 से भी कम लोग बसते हैं। 10 हजार से अधिक आबादी वाले नगर तो केवल 1800 ही हैं।