गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण
Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंतन मन और धन की बर्बादी
चौथी पंचवर्षीय योजना में शिक्षा के लिए 7 अरब 83 करोड़ 31 लाख रुपये निश्चित किए गए थे। जिससे निम्नानुसार विद्यार्थी संख्या उस योजना की समावधि में होगी, ऐसा अंदाज लगाया गया था।
| कक्षा एक से पाँच | - | 689 लाख |
|---|---|---|
| कक्षा छह से आठ | - | 176 लाख |
| कक्षा नौ से ग्यारह | - | 98 लाख |
| कक्षा विश्वविद्यालय अभ्यास | - | 27 लाख |
कुल संख्या 990 लाख
उपर्युक्त विवरण के अनुसार प्रथम कक्षा में दाखिल हुए 689 लाख विद्यार्थियों में से केवल 27 लाख विद्यार्थी कालेजों में प्रवेश पा सकते थे। वे नौकरी के अलावा शायद ही दूसरा कोई काम कर सकते थे। सरकार और बड़ी-बड़ी औद्योगिक कंपनियाँ, दोने साथ मिलकर भी इन लाखों उपाधि-धारकों को नौकरी दे नहीं पाती।
A hand in a suit sleeve holds a fan of Indian currency notes. The notes are engulfed in bright orange and yellow flames, with smoke rising from the top. This image serves as a metaphor for the wastefulness of money and the loss of its value.
तो फिर उद्योगों की आवश्यकता की पूर्ति के लिए गिनती के शिथिलताओं को पाने हेतु लाखों युवकों को कॉलेजों और शालाओं में खींच कर उनके मन, तन एवं उनके मां-बाप के धन की बर्बादी ही की जाती रही है। वास्तव में यह शिक्षा नहीं हैं, लेकिन राष्ट्र के उत्तम बुद्धिधन का उद्योगों द्वारा किया जाने वाला अपहरण ही हैं।