गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण
Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभारतवासियों को शिक्षा देने के विरुद्ध उग्र विरोध
किसी भी प्रजा का सर्वनाश करना हो तो उसे उसके धर्म, संस्कृति और भाषा से अलग कर देना चाहिए। भाषा ही तो धर्म और संस्कृति की बाहक है। अतः भाषा के विनाश द्वारा धर्म और संस्कृति अपने आप ही नष्ट हो जाती है। भाषा का नाश करने के लिए विद्या-अध्ययन, पठन-पाठन कराने वाली संस्थाओं और साधनों का नाश कर देना चाहिए।
इस सिद्धान्त के आधार पर ई.स. 1757 से ही अंग्रेज शासक भारतवासियों की शिक्षा संस्थाओं को हिन्दवासियों के शिक्षा देने के सवाल पर ब्रिटिश शासकों द्वारा उग्र विरोध किए जाने के बाद उनमें से कुछेक को ही अपने (ब्रिटिश) प्राचीन साहित्य और विज्ञान की जानकारी दी जाए, ऐसे प्रस्ताव के समर्थन में उसने कहा- 'अंग्रेजी शिक्षा द्वारा हिन्दू समाज में एक ऐसे वर्ग का निर्माण करना चाहिए, जो जिन पर हम शासन करते हैं ऐसे असंख्य भारतीय लोग और हमारे बीच समन्व का काम करें। वह वर्ग ऐसा होना चाहिए कि जो हमारी शिक्षा प्राप्त करने के बाद केवल वर्ण और खून से ही भारतीय हो, लेकिन रुचि, भाषा, विचार और भावना की दृष्टि से अंग्रेज बन गया हो'।