भारतकोश
गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण

गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण

Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman

राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा

स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished78 पृष्ठ

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पृष्ठ 35

(Letters from the Court Of Directors of Governor General

in Council of Bengal, Dated 3rd, June 1814)

शिक्षा की यह व्यवस्था इतनी सुदृढ़ थी कि भारत में हजारों वर्षों से शासनों का उलटफेर होते रहने पर भी इन शिक्षा-संस्थाओं को कोई हानि नहीं पहुँच पाई, क्योंकि सल्तनतों के उलटफेर के पीछे हिन्दू धर्म और संस्कृति के विनाश का उद्देश्य नहीं था, अपितु राजसत्ता की लालसा थी। यदि हिन्दू धर्म और हिन्दी संस्कृति के विनाश की भावना भी हो तो उसके लिए पशुबल उपयोग के सिवा अन्य कोई चारा न था।

लेकिन भारत के जिन इलाकों पर अंग्रेजों ने प्रभुत्व जमाया, वहाँ उनकी घुसपैठ बल प्रयोग द्वारा न थी, बल्कि भेदी षड्यंत्रों के साथ धोखाधड़ी और भारतवासियों की बफादारी के गलत इस्तेमाल के कारण हुई थी। सत्ता-प्राप्ति के बाद हमारे धर्म संस्कृति के सर्वनाश के लिए और हमारी शिक्षा-संस्थाओं एवं शिक्षा-पद्धति को खत्म कर, लोगों को अनपढ़ और निरक्षर रखना उनका उद्देश्य था।

पोषक बलों का खात्मा कर दिया

भारत की सुव्यवस्थित प्रख्यात विद्यापीठों और गावों कि शिक्षा संस्थाओं को देखते – ही – देखते खात्मा कर दिया गया। तलवार से नहीं, बल्कि जहाँ से उनका पोषण प्राप्त करने के स्रोत बह रहे थे, वहीँ सुरंगे दाग दी। इसका सही ख्याल हमें तत्कालीन बेलारी जिले के कलेक्टर ए.डी केम्पबेल के ई.स. 1823 के एक विवरण से होता है। वे लिखते हैं कि ‘इस समय ऐसे अंसख्य परिवार हैं, जो अपने बच्चों को जरा भी शिक्षा नहीं दे पाते।..... मुझे यह बताते हुए दुःख होता है कि देश क्रमशः निर्धन होता जा रहा है।’