भारतकोश
गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण

गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण

Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman

राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा

स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished78 पृष्ठ

पृष्ठ 54, कुल 78 में से

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में कितनी उपयोगी होती हैं, यह सोचनेवाली बात हैं। वर्तमान शिक्षा ने हमारे सांस्कृतिक पर्यावरण को खूब विकृत किया है। आज मानवता ऑक्सिजन पर आखिरी सांस ले रही है। सरस्वती मंदिर आज अनाचार व दुराचार के अड्डे बन गये हैं। हमारी प्राचीन गुरुकुल व्यवस्था एवं उसमें प्रदान की जाने वाली शिक्षा का त्याग कर हम नौकरी व अर्थ के लालच में अंग्रेजी बाबू बनने के चक्कर में पड़ गये हैं। शिक्षा-शक्तियों का स्पष्ट मत हैं कि बच्चों की बुद्धि का विकास मातृभाषा में शिक्षा के माध्यम से जितना अधिक हो सकता है, उतना अन्य भाषा के माध्यम से संभव नहीं है। फिर भी हम मातृभाषा को छोड़कर अंग्रेजी भाषा के माध्यम से दी जाने वाली शिक्षा की अंधी दौड़ में शामिल हो रहे हैं। इसके दुष्परिणाम सामने आने लग गये हैं। अभी भविष्य की कल्पना तो और अधिक भयावह हैं।

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि न्यूयार्क (अमरीका) में अब्राहम लिंकन स्कूल प्रारंभ किया गया है, जिसका मुख्य कार्यालय लंदन में है। अन्य अनेक देशों में भी उसकी शाखाएँ प्रारंभ की गई हैं। वहाँ हमारी देवभाषा संस्कृत, प्रचीन गणित एवं तत्वज्ञान की शिक्षा दी जाती है। स्कूल-प्रबंधनने पांच वर्ष या उससे बड़ी उम्र के बच्चों को इस स्कूल में भेजने के लिए जनता से आग्रह किया है। उन्होंने कहा है कि अपने बच्चों को श्रेष्ठ, आदर्श स्वच्छ व प्रामाणिक नागरिक बनने के लिए हमारे स्कूल में भेजिए।

तत्संबंधी हमारा ध्यान इस ओर कब जायेगा, जब हम अपनी पुरानी गुरुकुल शिक्षा प्रणाली की ओर लौटेंगे। कम से कम अब न्यूयार्क के अब्राहम लिंकन स्कूल को देखकर तो हमें कुछ सोचना ही चाहिए। जितनी जल्दी हम इस ओर ध्यान दे पायेंगे, उतना ही लाभप्रद होगा।

-जे.के. संधवी

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