गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण
Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंहैं। आपके बच्चे वही खाएंगे जो टेलीविजन कहेगा, वही पहनेंगे जो टेलीविजन चाहेगा, वहीं सोचेंगे जो टेलीविजन बोलेगा।
पश्चिमी अर्थशास्त्र की मान्यता है कि किसी समाज पर कब्जा करना हो तो, पहले उस समाज के बच्चों पर काबिज हो जाओ। देश तो अपने आप गुलाम हो जाएगा।
बच्चों को संस्कार दीजिए, संपत्ति नहीं...
बच्चों को संस्कार दीजिए, संपत्ति नहीं। बच्चों को नैसर्गिक भारतीय जीवन शैली में ढालना ही इसका एकमात्र उपाय है। मंदिर बनवाने से ज्यादा जरूरी है, बच्चों को मंदिर में जाने की पात्रता देना। वरना जिस तरह आज जीन्स और टाई पहन कर कृष्ण कन्हैया की आरती उतारने के दृश्य देखे जा सकते हैं, कल हमारे बच्चे कोकाकोला पीकर और बर्गर खाकर उपवास करेंगे और प्रसाद में अल्कोहलिक चॉकलेट देना घर की इज्जत का प्रतीक बन जाएगा।
संपत्ति बच्चों को बिगाड़ती है, संस्कार उन्हें सहज और नैसर्गिक जीवन जीने की ऊर्जा देते हैं। संपत्ति को भोगने की एक सीमा है, संस्कारों के साथ जीवन जीने के सुख अनंत हैं।
- नंदकिशोर राजगड़िया