भारतकोश
गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण

गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण

Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman

राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा

स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished78 पृष्ठ

पृष्ठ 57, कुल 78 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 57

आज तो जो विद्या की अर्थी उठा दे, वही विद्यार्थी...

बेरोजगारी का अंतिम पड़ाव अपराध है। अब तक यह माना जाता था कि अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे लोग ही अपराध की ओर मुड़ते हैं। आश्चर्यचकित करने वाली बात यह है कि आजकल पढ़े-लिखे लोगों का अपराध पर एकाधिकार हो गया है। फराटेंदार अंग्रेजी बोलने वाले माफिया गिरोहों में शामिल हो रहे हैं। सरकारी तंत्र का पढ़ा-लिखा तबका हर तरह के अपराध करने में सबसे आगे है।

A composite illustration. The top part shows a conveyor belt with several graduates in blue gowns and caps. The bottom part is a collage of educational symbols: a building labeled 'COLLEGE', a blue 'MBA' logo with silhouettes of people, a graduation cap with a red ribbon, the word 'EDUCATION', and a stack of books.

हिन्दुस्तान का अंगूठा छाप आदमी आज भी ईमानदारी से जीना चाहता है। जितना मिल जाए, उसी में गुजर-बसर करने को तैयार हैं।

शिक्षा का अर्थ तो यह होना चाहिए कि दूसरों के होठों की मुस्कराहट हमारी खुशी बने। हम विद्या और शिक्षा को पर्यायवाची न समझें। प्रशिक्षित तो हम पशु को भी कर सकते हैं, पर हम उसमें विवेक नहीं जगा सकते। यह विवेक ही मनुष्य को पशु से श्रेष्ठ बनाता है। विद्या जानना है जबकि शिक्षा सीखना। शिक्षा ली जाती है, विद्या अर्जित की जाती है। हमें आज के विद्यार्थियों को विद्या के साथ-साथ शिक्षा भी देनी है। आज तो जो विद्या की अर्थी उठा दे, वही विद्यार्थी।

-अनंत श्रीमाली (कवि, व्यंग्यकार और मंच संचालक)