गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण
Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
पृष्ठ 6, कुल 78 में से
संदर्भ में पढ़ेंअतः इस परम्परा को पुनः प्रस्थापित करनी ही चाहिए। तभी, मैकाले-शिक्षा के दुष्प्रभाव से हमारे देश में आज जो दुर्दशा हुई है, उस से हम भारत को बचा पाएंगे।
वर्तमान की सभी समस्याओं का मूल आधुनिक शिक्षा-प्रणाली ही है। इस शिक्षा को लेने वाले जैसे-जैसे बढ़ते गए... वैसे-वैसे गरीबी, बेरोजगारी, बीमारी, मंहगाई, अनीति, अपराध, आत्महत्याएं, भ्रष्टाचार, व्यभिचार, अनाचार और बलात्कारों की संख्या बढ़ती गई। वायु, जल, जमीन, जंगल और जानवर सभी आज दूषित हैं। ऐसी भयावह दुर्दशा के सूत्रधार प्रायः मैकाले-शिक्षण प्राप्त शिथिल ही होते हैं।
गुरुकुलम् का मंगल आरंभ –
मूल बेड़ा (राजस्थान) निवासी एवं हाल साबरमती (अहमदाबाद) में रहने वाले श्री उत्तमभाई जवानमलजी शाह ने आधुनिक शिक्षा की भंयकरता एवं आर्य शिक्षण की कल्याणकारिता के विषय में सद्गुरुदेवों के द्वारा मूल्यवान् मार्गदर्शन प्राप्त किया।
और... राजनगर (अहमदाबाद) में प्रकाशपुंज समान गुरुकुलीय आर्यशिक्षापद्धति का पुनः उदय हुआ। पाश्चात्य जीवनशैली के कातिल जहर से संतानों को बचाने के लिए, पुरुषों की 72 एवं स्त्रीओं की 64 कलाओं पर आधारित कार्यशिक्षण ही श्रेष्ठ उपाय है, बस... इस पवित्र उद्देश्य और शुभ संकल्प के साथ, श्री उत्तमभाई ने आज से 23 वर्ष पहले अपने और अपने भाईयों के परिवार के पुत्र-पुत्रियों को घर में ही रखकर आर्य-प्रशिक्षण देना प्रारंभ किया। उसमें सफलता प्राप्त हुई, तो एक कदम आगे बढ़कर वर्षों तक 'सिद्धाचल-वाटिका' (साबरमती) में अपने घर में 25-30 बच्चों को गुरुकुल-शिक्षापद्धति के अनुसार प्रशिक्षण देना प्रारम्भ किया। इसके फलस्वरूप सूरत, मुंबई और अहमदाबाद में भारतीय संस्कृति को प्रकाशमान करने वाले अन्य गुरुकुलों का शुभारंभ हुआ।
और पिछले 6 साल पहले निवासी एवं निःशुल्क 'हेमचंद्रचार्य संस्कृत पाठशाला (गुरुकुलम्)' का सिर्फ 13 विद्यार्थियों की संख्या के साथ, वि.सं. 2065, मृगशीर्ष सुद त्रीज, रविवार, (दि. 30-12-008) के शुभ दिन पर साबरमती