गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण
Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें(अहमदाबाद) में प्रारंभ किया गया था। आज इस गुरुकुलम् की प्रेरणा व मार्गदर्शन से देश के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक गुरुकुल शुरू हो चुके हैं।
A photograph showing a group of young boys, likely students, sitting on the ground in an outdoor setting. They are wearing white dhotis. The boy in the foreground is looking towards the camera with a slight smile. A dark banner with white text is overlaid at the bottom of the image.
गुजरात के ये बच्चे देते हैं पूरी दुनिया को चुनौती !
‘गुरुकुलम्’ द्वारा ‘मैकाले-पुत्र’ नहीं ‘महर्षि-पुत्र’ का निर्माण –
‘हेमचन्द्राचार्य संस्कृत पाठशाला’ (गुरुकुलम्) आर्यशिक्षण प्राप्त करने के लिए श्रेष्ठ विकल्प है। यह संस्था आधुनिक विनाशकारी मैकाले शिक्षा-पद्धति से देश को मुक्त करवाने के लिए प्रयत्नशील है। व्यक्ति-निर्माण से कुटुम्ब-निर्माण, कुटुम्ब-निर्माण से समाज निर्माण, समाज निर्माण से राष्ट्र-निर्माण एवं राष्ट्र-निर्माण से विश्वनिर्माण करने में अपना महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करने के लिए कटिबद्ध है।
An illustration of an elderly sage with a long white beard, wearing a yellow dhoti, sitting on the ground and writing on a palm leaf manuscript. He is surrounded by a lush green landscape with trees and a small hut in the background.
हम मानते हैं कि इस पाठशाला में से प्रशिक्षण प्राप्त किए हुए विद्यार्थी ‘मैकाले-पुत्र’ नहीं किन्तु ‘महर्षि-पुत्र’ बनकर भारत को जगदगुरु बनाने में अपना योगदान करेंगे।
‘गुरुकुलम्’ (हेमचन्द्राचार्य संस्कृत पाठशाला) का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थी के चरित्र्य निर्माण के साथ-साथ सर्वतोमुखी विकास करने का है, उसके लिए उसे ऋषि-महर्षियों द्वारा प्रस्थापित पुरुषों की 72 कलाओं और महिलाओं की 64 कलाओं पर आधारित प्रशिक्षण दिया जाता है। इस प्रकार की शिक्षा के द्वारा विद्यार्थी ‘ज्ञानी’, ‘गुणीयल’, ‘सधम’, ‘बुद्धिमान्’ और ‘चरित्र्यवान्’ बनता है।