भारतकोश
गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण

गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण

Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman

राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा

स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished78 पृष्ठ

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माँ-बाप का बेटे के प्रति कर्तव्य है कि वे अपनी संतान को इतना सुयोग्य बना दे कि सत्पुरुषों सज्जनों की सभा में वह अग्रिम पंक्ति में बैठने कि पात्रता रखें और बेटे का माँ-बाप के प्रति कर्तव्य वह है कि वह ऐसा जीवन जिये, जिससे हर आदमी उसके माँ-बाप से पूछे कि तुमने किस पुण्य कर्म के उदय से ऐसा सुपुत्र पाया हैं। माँ किसी बेटे कि जागीर नहीं होती और संस्कारों पर किसी का एकाधिकार नहीं होता। पुत्र को जन्म देने मात्र से स्त्री माँ नहीं हो जाती और कोई पुरुष बाप नहीं हो जाता। माँ-बाप को अपनी संतान के प्रति उनके क्या-क्या कर्तव्य और दायित्व हैं, यह ज्ञान भी होना चाहिए।।

नाट्य कलाएं, संगीत, नृत्य, चित्रकला, साहित्य की विभिन्न विद्याएँ, कला के अलग-अलग रूप हैं और कलाएँ इंसान को संस्कारित करती है, उसे संवारती है, उसे पशु होने से बचाती है, उसके जीवन में संतुलन रखती है। मगर कलाकर्म के इस मर्म को पीछे धकेल कर व्यवसाय कर्म से जोड़ दिया जाये, तो जो नतीजे आने चाहिए वे आज की कटु मगर चिंताजनक सच्चाई हैं।

-मुनि श्री प्रसन्न सागरजी

भारतवर्ष में गुरुकुल कैसे खत्म हो गए?

1858 में Indian Education Act बनाया गया। इसकी ड्राफ्टिंग लोर्ड मैकाले ने की थी। लेकिन उसके पहले उसने वहाँ (भारत) के शिक्षा व्यवस्था का सर्वेक्षण कराया था, उसके पहले भी कई अंग्रेजों ने भारत की शिक्षा व्यवस्था के बारे में अपनी रिपोर्ट दी थी। अंग्रेजों का एक अधिकारी था G.W. Litnar और दूसरा अधिकारी था Thomas Munro दोनों ने अलग-अलग इलाकों का अलग-अलग समय सर्वे किया था। 1823 के आस-पास की बात है। Litnar जिसने उत्तर भारत का सर्वे किया था, उसने लिखा था कि यहाँ 97% साक्षरता है और Munro, जिसने दक्षिण भारत का सर्वे किया था उसने लिखा कि यहाँ तो 100% साक्षरता है, और उस समय जब भारत

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