गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण
Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंकहा जाता था। इसी कानून के तहत भारत में कलकत्ता यूनिवर्सिटी, बम्बई यूनिवर्सिटी, मद्रास यूनिवर्सिटी बनाई गयी और ये तीनों गुलामी के जमाने के यूनिवर्सिटी आज भी इस देश में हैं।
मैकॉले ने अपने पिता को एक चिट्ठी लिखी थी, बहुत मशहूर चिट्ठी है वो। उसमें वो लिखता है कि, ‘इन कॉन्वेंट स्कूलों में ऐसे बच्चे निकलेंगे जो देखने में तो भारतीय होंगे लेकिन दिमाग से अंग्रेज होंगे और इन्हें अपने देश के बारे में, अपनी संस्कृति के बारे में, अपनी परम्पराओं के बारे में कुछ पता नहीं होगा, इनको अपने मुहावरे नहीं मालूम होंगे। जब ऐसे बच्चे होंगे इस देश में तो अंग्रेज भले ही चले जाएँ इस देश से अंग्रेजियत नहीं जाएगी।’ उस समय लिखी चिट्ठी की सच्चाई इस देश में अब साफ-साफ दिखाई दे रही है और उस एक्ट की महिमा देखिये कि हमें अपनी भाषा बोलने में शर्म आती हैं, अंग्रेजी में बोलते हैं कि दूसरों पर रोब पड़ेगा, अरे! हम तो खुद हीन हो गए हैं जिसे अपनी भाषा बोलने में शर्म आती हैं, अंग्रेजी में बोलते हैं कि दूसरों पर रोब क्या पड़ेगा। लोगों का तर्क है कि अंग्रेजी अंतर्राष्ट्रीय भाषा है किन्तु दुनिया में 204 देश हैं और अंग्रेजी सिर्फ 11 देशों में बोली, पढ़ी और समझी जाती है, फिर यह कैसे अंतराष्ट्रीय भाषा है? शब्दों के मामले में भी अंग्रेजी समृद्ध नहीं, दरिद्र भाषा है। इन अंग्रेजों की जो बाइबल है वो भी अंग्रेजी में नहीं थी और ईशा मसीह अंग्रेजी नहीं बोलते थे। ईशा मसीह की भाषा और बाइबल की भाषा अरमेक थी। अरमेक भाषा की लिपि जो थी, वो हमारे बंगला भाषा से मिलती जुलती थी, वहाँ का सारा काम फ्रेंच में होता है। जो समाज अपनी मातृभाषा से कट जाता है, उसका कभी भला नहीं होता और यही मैकॉले की रणनीति थी।
अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा लूट मचाने वाली मल्टीनेशनल कंपनियों के लिए सेल्समैन तैयार कर रही हैं।