भारतकोश
गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण

गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण

Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman

राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा

स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished78 पृष्ठ

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वैश्वीकरण और बेहिसाब आयात के कारण लाखों छोटे और माध्यम दर्जे के उद्योग एवं कारखाने बंद हो गए हैं। न तो नौकरियाँ है और न ही रोजगार के अवसर। स्वास्थ्य आम आदमी के हाथ से निकल गया हैं।

यह कहना कि अंग्रेजी जानने से सुबह उठते ही नौकरी मिल जाएगी या रोजगार में आप हेनरी फोर्ड का दर्जा हासिल कर लेंगे, आत्मच्छलना के सिवा कुछ नहीं है। जिस देश की आधी आबादी गरीबी रेखा के नीचे रहती हो, वहाँ इन्फोसिस की सफलता को आदर्श के रूप में पेश करना मानसिक दिवालियापन का सबूत हैं। सिर्फ अंग्रेजी के सहारे न तो आप चुनाव जीत सकते हैं और न ही फिल्मों या सीरियल में कामयाब हो सकते हैं।

हिन्दुस्तान के अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में क्या हो रहा है? मल्टीनेशनल कम्पनियाँ बच्चों को मुक्त केडबरी खिला रही हैं, जिसमें कीड़ा होता है। बच्चों को फिल्म दिखाकर आदी बनाया जा रहा हैं कि कोलगेट इस्तेमाल नहीं करोगे, तो मुहँ के सारे दाँत गिर जाएँगे। अब यह बताना जरुरी नहीं है कि कोलगेट में जानवरों की हड्डियों का चूर्ण मिलाया जाता हैं। हद तो तब हो गई जब एक विदेशी कंपनी द्वारा लड़कियों में नेपकिन बाँटे गए।