भारतकोश
गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण

गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण

Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman

राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा

स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished78 पृष्ठ

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व्यापारीकरण हो रहा हैं, उससे वह स्पष्ट है कि यूरोप और अमेरिका को भारत के बाजार पर कब्जा जमाने के लिए नए दलालों और गुलामों की सख्त जरूरत है। अंग्रेजी माध्यम की तालीम लूट मचाने वाली मल्टीनेशनल कम्पनियों के लिए सैलसमैन तैयार कर रही है। पूरी प्राथमिक शिक्षा को विश्व बैंक चला रही है। बुनियादी सवाल मौजूदा व्यवस्था को बदलने का है।

आई.आई. टी., प्रोफेशनल्स के एक ग्रुप ने मुझे भाषण देने के लिए आमंत्रित किया था। क्वालिटी के मुद्दे पर मेरा कहना था – ‘हमारे बच्चों के मुकाबले यूरोप के बच्चे बेहद खूबसूरत, गोरे-चिट्ठे और हष्ट-पुष्ट होते हैं। क्या अपने बच्चों की क्वालिटी सुधारने के लिए यूरोप के मदों को हम बुलाना पंसद करेंगे? ऐसी स्पर्धा में शामिल होने का क्या तुक हैं, जो हमें हमारी पहचान से बेदखल कर दें?’

अंग्रेजी सीखने वाला बच्चा स्मार्ट इंटेलीजेन्ट और एक्टिव होता है, ऐसी मान्यता धोखाधड़ी का पर्याय हैं। हमें अपनी औकात से रूबरू होना चाहिए। हम जैसे हैं, उसे स्वीकार करना ही हमारे जीवन का आनंद है। जिसे अपनी भाषा और रीति-रिवाजों और अपने पुरखों से मिलें जीवन-मूल्यों पर गर्व होगा, वही स्वाभिमान से जी सकता है। अपने बच्चों को अमेरिकन या यूरोपीयन बनाने के मोह से बचाइये।

-अक्षय जैन

स्कूल में बाजार....

अब वक्त आ गया है, जब हमें अपने बारे में सोचना चाहिए। क्या अपने समय का थोड़ा हिस्सा हर रोज अपने बारे में सोचने के लिए नहीं निकाल सकते? क्या हमें इस बात पर नहीं सोचना चाहिए कि हमारे बच्चों के साथ स्कूलों में क्या हो रहा हैं?

आईसक्रीम बनाने वाली एक कंपनी स्कूलों में एक इनामी प्रतियोगिता आयोजित करती है। जो बच्चा प्रमोटर कंपनी की आइसक्रीम के