गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण
Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंचलते संस्कृति का संकट भी अब भयानक रूप में दिखने लगा है। हिंसा, भ्रष्टाचार, बलात्कार, देश-समाज के प्रति संवेदनहीनता जैसी ढेरों समस्याएँ इसी की अनिवार्य परिणतियाँ हैं।
सवाल यह है कि क्या इस देश के वजूद को तिल-तिल कर समाप्त होते हुए हम देखते रहेंगे?
संसाधनों के अकूत भंडार से समृद्ध भारत की धरती पर रहते हुए और मेहनत कश होते हुए भी क्या इस देश की एक बड़ी आबादी फुटपाथों पर जिंदगी गुजारने और भूख से पेट मरोड़ने को ही हमेशा अभिशास रहेगी? ऋषि-मुनिओं के इस देश में क्या अब माइकल जैक्सनों और मेडोनाओं के कार्टून ही तैयार होते रहेंगे?
अगर आप देश की इस वर्तमान दिशा और दशा से संतुष्ट हैं तो हमें आपसे कुछ नहीं कहना है। लेकिन यदि आप भी हमारी तरह चाहते हैं कि यह राष्ट्र स्वावलम्बी बनें, यहाँ का समाज खुशहाल हो, हर तरफ अमन-चैन हो, दया-करुणा-ईमानदारी-संयम का सांस्कृतिक प्रवाह इस देश में फिर कायम हो, तो हमें आपकी जरूरत है। हमारी अपील है कि आप भी सच्चे सुराज्य के लिए चल रहे इस महायज्ञ में शामिल होइए।
यदि भारत की अर्थव्यवस्था, कृषि-व्यवस्था, शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य-व्यवस्था तथा न्याय-व्यवस्था का सम्पूर्ण स्वदेशीकरण हो जाए तो यह देश स्वावलंबी बन जाएगा, बेरोजगारी की समस्या नहीं रहेगी और सच्चे अर्थों में हमें स्वराज्य प्राप्त होगा। इस देश के विकास का ढाँचा, इस देश के सांस्कृतिक मूल्योंं भौगोलिक परिस्थितियों, संसाधनों और यहाँ की जनता की समझ व जरूरतों को ध्यान में रखकर ही बनाय जाना चाहिए, तभी अनगिनत समस्याओं से मुक्ति मिल पाएगी और एक बार फिर हम दुनिया के मार्गदर्शक की भूमिका में आ सकेंगे।
जिनमें अकेले चलने के हौंसले होते हैं, उनके पीछे एक दिन काफिले होते हैं।