गुरुकुल शिक्षा: भारत-पुनर्निर्माण
Gurukul Shiksha: Bharat Punarnirman
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Shiksha Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंहॉर्न धीरे बजाएं देश सो रहा है
लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि विदेशी लुटेरों के चलते महादानीयों का यह देश भिखारी बन चुका है। खास बात यह है कि लूट के लंबे इतिहास में भी हमारी सबसे ज्यादा लूट अंग्रेजों ने की। अंग्रेजों की गुलामी के दौर में सम्पत्ति-संसाधनों के साथ-साथ हमारी संस्कृति को भी तबाह करने की साजिश रची गई। अपने साम्राज्य की जड़ें मजबूत करने के लिए अंग्रेजों ने भारत की सारी व्यवस्थाओं को ही अपने अनुसार बदलने की मुहिम चलाई। इस मुहिम में वे काफी हद तक सफल भी रहें। अगर कुछ कसर बाकी रह गया था, तो आजादी के बाद अंग्रेजों के मानसपुत्रों ने आजादी के दीवानों के लाखों बलिदानों को बेमानी बना दिया हो।
कटु सत्य यह है कि हम आजादी के भ्रम में जी रहे हैं। अंग्रेज चाहते थे कि हम मानसिक रूप से गुलाम हो जाएँ, तो उन्हें बंदूकों-तोपों की भाषा न बोलनी पड़े, सो अब वही हो गया है। हमारा शासन-प्रशासन और विकास का संपूर्ण ढाँचा अब भी लगभग जस-का-तस है। इसी का नतीजा है कि आज हम कहीं ज्यादा बड़ी लूट के शिकार हो रहे हैं। जब हम एक ईस्ट इंडिया कंपनी की जेब अनिच्छा के बावजूद अंग्रेजी कोड़ों-बंदूकों के डर से भरते थे, पर अब मानसिक गुलामी के वशीभूत हम हजारों बहुराष्ट्रीय कंपनियों की जेब स्वेच्छा से भर रहे हैं।
देश लगातार कंगाल हो रहा है और नतीजे के रूप में बेरोजगारी भुखमरी का भयावह दृश्य सामने है। विकास के पश्चिमी तौर-तरीके के