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हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

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२४ हम्मीररासो वसंत ऋतु वर्णन छंद लघुनाराच असंत संत मोहियं, बसंत खोलि जोहियं । बजंत¹ बीन बाँसरी, मृदंग संग आँसुरो ॥ १३० ॥ लियं सुबाल बृंदयं, जगत्त कामँ द्वंदयं । अनेक रूप सुंदरी, मनोज राव की छुरी ॥ १३१ ॥ स्वबेस केस पासयं, मनो कि मैन फाँसयं । गुही त्रिबिद्धि बैनियं, कि मोह किन्न² सैनयं ॥ १३२ ॥ महा सुघट्ट पट्टियं, सृँगार भूमि फट्टियं । बिचै सुमंद³ रेखयं, महा बिसुद्ध देखयं ॥ १३३ ॥ बिसाल भाल सोमियं, छपा सु नाथ लोभियं⁴ । सु मध्य सीस फूलयं, दिनेस तेज तूलयं५ ॥ १३४ ॥ भरी सु मुक्त मंगयं, मनो नक्षत्र संगयं । बिसाल लाल बिंदयं, मिले सु भोम चंदयं ॥ १३५ ॥ जराव आड भाइयं⁶, मनो मिलन्न आइयं । दिनेस भोम बुद्धयं, ससि गृहे सु सुद्धयं । १३६ । कपोल गोल आह्नसं, कि भौंह भौर साहसं । प्रफुल्ल कंज लोचनं, मृगाखिख⁷ गर्ब मोचनं ॥ १३७॥ त्रिबिद्ध रंग गातयं, सु स्याम स्वेत राजयं८ । बनी कि कीर नासिका, सु गत्थ नत्थ भासिका ॥ १३८॥ मनो सु काम ओपयं९, दयौ सुचक्र१० कोपयं । करन्न फूल राजयं, उभै कि भाँन साजयं ॥ १३९ ॥ १ सुढंग ताल खंजरी । उपंग संग श्रंसुरी । २ कीन । ३ सुमंग, माँग । ४ लोपियं । ५ तुल्यं । ६ भालय । ७ मृगासि । ८ रातयं । ६ वोपयं । १० चक्र । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri