हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[Page Header] हम्मीररासो २७
लगत गेंद कंपित उर भागी । मंद मुसुकि ऋषि निकट सुपागी १ ॥ १५१ ॥ सुमन बूंद सौरभ उठि भारी । भ्रमर पुनीत२ गुँजार३ उचारी४ ॥ सरद उन्मद्५ संधाँन सु किन्हौ । अति रिसि तानि स्त्रवन उर दिन्हौ ॥ १५२ ॥ छुटि समाधि ऋषि नैन उघारे । अति सकोपि सम्मर उर मारे ॥ चहुँ दिसि चितै६ चक्रित ऋषि भयऊ । लखि तिय बृंद अनंद सु भयऊ ॥१५३॥ लीला गेंद फागु मिसि७ दौरी । हो हो करत उठी बर जोरो८ ॥ बन अकेलि तिय पुरुष न कोऊ । लीला अमित देखि दृग दोऊ ॥१५४॥ रंग अपार डारि ऋषि ऊपर । कल कल हंस बजत पद नूपर ॥ करैं९ कटाक्ष अनेक सु बाला । नैन सैन सर लगि चित चाला ॥१५५॥ अंग अंग गहि फाग१० सु मगै । परसि गात तब कॉंम सु जगै११ ॥
१ सुनि बादित्र गाँन कल लीला । कॉंम कोपि सर धनुष सुमीला । २ पुनिच । ३ गुंजार । ४ त्रिबिधि समीर सुहावन जानी । प्रफुलित नूत बैठि धनु पानी । ५ उन्माद । ६ चित । ७ मिलि । ८ कंदुक केलि और मिसि होरी । भोरी निपट लेत चित चोरी । डारि मोहिनिय मोहिव जाला । माया बसि भौ ऋषि तिहिं काला । ९ करत । ११ फाग सुमागै । ११ जागै ।
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