हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहम्मीररासो ४३ छप्पय छंद मिटी पवन परचंड, मिटिव मनमथ मद भारिव । हटेउ तिमर तिहिँ समय, प्रगट परगा(का)स सुधारिव ॥ सकल सत्थ जथ तत्थ, मिले अप्पन १ थल आइव । साहि हुरम को सोध करिव तिहिँ समय सुहाइव ॥ दिन्नी जु सिक्ख तब सेख कौं, अप्प अप्प सिबरन गयय२ । पहुँची सु जाय पतिसाह पै, हुरम साह आदार दियव ॥२४३॥ तब सु साहि करि कुच्च,३ सकल दिल्लिय दिसि आयव । चढ़िव सेन समूह, धूरि उड़ि अंबर छाइव ॥ घुमरि घुमरि निस्साँन,४ घोर दुंदभि घन बज्जिय । सकल खाँन उमराव, हरष संजुत मग रज्जिय ॥ कीन्हौं५ प्रबेस निज निज घरन, साह महल दाखिल भयव । सुख खाँन पाँन सौगंधजुत, अप्प अप्प६ रस बस भयत्र७ ॥२४४॥ इक्क८ समय पतिसाह, हुरम सँग सेज बिराजे । दंपति अति रस लीन, काक की कला९ सुसाजे ॥ रमत करत परकार, इक्क१० आसन रस११ भीने १२ । सरस परस्पर मुदित, उदित कंद्रप तन चीने ॥ तिहिँ समय दैव संजोग तै, इक आखू+ आवत भयव । देखंत ताहिं पतिसाहि को, मदन द्वंद उतरि गयव ॥२४५॥ दोहरा छंद मूषक हजरति देखि कै, आसन तजि ततकाल । लै कमाँन संधानि कै, हन्यौ तार लखि वाल ॥२४६॥ १ आपन । २ दीनी जु सीख तब सेख कौं आय आय डेरन गयव । ३ कूँच । ४ नीसाँन । ५ किन्हौ । ६ आप आप । ७ बसि छयव । ८ एक । ९ केलि । १० एक । ११ रति । १२ भिन्ने,चिन्ने,भिन्नय,चिन्नय, अंत्यानुप्रास । +आखू (आखु)= मूसा । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri