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हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

पृष्ठ 140, कुल 258 में से

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पृष्ठ 140

५४ हम्मीररासो अलादीन सू¹ औलिया, फिरत चहूँ दिसि आनि । निबल सबल के बाद सों, किन सुख पायौ जानि ॥३०८॥ ·मुक्तादाम² छंद कहै तब दूत सुनो नृप बात । बड़ो तुव बंस प्रताप सुहात³ ॥ तजो⁴ रतनागर को सर हेत । रत्न अमूल्य⁵ तजो रज हेत ॥३०९॥ कहो गुन कौन रखे इहि⁶ सेख । जरत्त जु बाल गहो⁷ सुबिसेष ॥ अजाँन असी जु करै नहिं राव । सुनो⁸ तुम नीति जु राज स्वभाव ॥३१०॥ तजो अब इक्क⁹ कुटुंब बचाय । तजो गृह इक्क सुग्राम सहाय ॥ तजो पुर इक सुदेस बचाय । तजो सब आतम हेत सुभाय ॥३११॥ महा यह नीच अधम्मिय¹⁰ सेख । टरचौ नहिं स्वामि तिया गुन देख ॥ बढ़ै पतिसाह¹¹ दिलीपति¹² बैर । लख्यौ नहिं आँनन प्रात सुफेर ॥३१२॥ प्रलै जिहिं रोष तजै धर देह । हमीर सु राव सुनो रस¹³ भेव ॥ बढ़ै निति नेह तुमै पतिसाह । अमीरस मैं बिष घौरत काह ॥३१३॥ १ से । २ मोतीदाम । ३ सुतात । ४ तजो सरनागत । ५ अमोल । ६ इह । ७ गही । ८ सुनी । ९ एक । १० अधर्मिय । ११ पुनि साह । १२ दिलीसहिं । १३ इह । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

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