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हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

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पृष्ठ 155

हम्मीररासो ६९ सबै राव हम्मीर कै देस माहीं । भए बीर संघीर जुद्धं समाहीं ॥३८५॥ तिहाँ¹बीचि मलहारणी इक्क² गढ़ढं । लरे राव कै रावतं जोर दड्ढं ॥ दिना तीन लौं सो कियौ जुद्ध भारी । फते³पातसा की भई बैनकारी ४ ॥३८६॥ चले अग्र ५ साहं सु सेना हँकारी । सुनी राव हम्मीर कुप्पे ६ सु भारी ॥ किये रक्त नैनं भृकुटी ७ क्रूरुं । लख्यौ रावतं जोर उट्ठे जरूरं ॥३८७॥ परी पक्खरं वाजि राजं सु सज्जे ८ । बजे नद्द निस्साँन ९ आकास लज्जे १० ॥ तबै राव हम्मीर कौ सीस नाए । बिना आयुसं साह पै बीर धाए ॥३८८॥ जुरे आय जुद्धं न दीजौ बनासं । चढ़े लक्ख चालीस औ पाँच तासं ॥ इतै राव हम्मीर कै पंच ११ सूरं । अभयसिंह पम्मार रठ्ठोर भूरं ॥३८६॥ हरीसिंह बघेल कूरम्म भीरं । चहूवाँन सद्दूल १२ अजमत्त सीमं ॥ त्रिभागै करी सेन बागैं उठाई । मिले बीर धीरं अमोरं हटाई ॥३९०॥ १ तहीं बिच्चि । २ एक । ३ भते । ४ बनकारी ( बन्नकारी ) । ५ अग्र । ६ कोपे । ७ भकुट्टी । ८ साजे । ६ नीसाँन । १० लाजे । ११ पाँच । १२ सार्दूल । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri