हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें११८ . हम्मीररासो चौपाई छंद राणी कहै सुनो महरावं । ऐसे बचन उचित नहिं भावं ॥ या तन बचन सार स्रुति भाखै १ । तन मन धन दै बचन जु राखै २ ॥६६७॥ तन धन भ्रात पुत्र अरु नारी । हरि बिधु त्यागि बचन प्रतिपारी ॥ राज पाट अनित्य ३ सु जानो । रहै नित्य इक सुजस बखानो ॥६६८॥ केकइ ध्वज अधविग्रह दीनौ । बिद्या भवन जोति जस लीनौ ॥ भव जो कही सत्य वह जानो । और न होय कोटि बुधि ठानो ॥६६६॥ दोहरा छंद 'कब हठ करै अलावदी, रणतभँवर गढ़ आहि । कबै सेख सरणे रहै, बहुरौ ४ महिमा साहि ॥६७०॥ सूर सोच मन मैं करो ५, पदवी ६ लहौ न फोरि । जो हठ छंडो राव तुम, उतन लजै अजमेरि ॥६७१॥ सरण राखि सेख न तजो, तजो सीस गढ़ देस । राणी गव हमीर को ७, यह दीन्हौ उपदेस ॥६७२॥ छप्पय छंद कहाँ पँवार जगदेव सीस आपन कर कट्यौ । कहाँ भोज बिक्रम सु राव जिन पर दुख मिट्यौ । १ भक्खै । २ रक्खै । ३ अनिच्च (त्य) । ४ बहुरचौ । ५ करै । ६ पदई । ७ की । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri