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हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

पृष्ठ 203, कुल 258 में से

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पृष्ठ 203

हम्मीररासो ११७ छप्पय छंद सुनि हजरति कै बचन राव हम्मीर रिसाए। कहा अलावदी साहि गब्र्ब कै बचन सुनाए॥ मैं हमीर चहुवाँन साह सौं हम कछु चाहैं। चिमना बेगम एक¹ और चिंतामणि साहैं॥ पाइक च्यारि पीराँ² सहित कहै³ साह ये दिज्जिये। छुटै न हठ हम्मीर को कुच्च दिली कौ किज्जिये॥६६४॥ ये हमीर कै बचन⁴ बाँचि⁵ पतिसाह रिसानौ। रे हराँम कमबख्त किसो गढ़ फते करानौ⁶॥ सुरजन झूठौ कहै राव हम्मीर न मानै⁷। नहिं महिमां कौ देइ⁸ मिलै नहिं हठी अमानै॥ यह कही साहि सुरजन्न⁹ तत्र देखिय¹⁰ अब कैसी बनै। रणथंभ राव हम्मीर जुत मिटैं होहिं¹¹ कौतुक घनै॥६६५॥ जब करि बदन मलीन राव रणवासहिं आए। उठि राणी कर जोरि राव कौं सीस नवाए॥ गढ़ बीतयौ¹² सामाँन भयौ भंडार सु रीतौ। ✳ टेक छोड़ि¹³ करि सेख देहु अब माँगु न बीतयौ¹⁴॥ बिलखाय बदन राणी कहै द्वादस बर्ष जु तुम लरे। बिप्रीति बुद्धि कौने दई हीन बचन¹५ मुख निक्करे॥६६६॥ १ इक्क। २ पीरन। ३ कहत राव। ४ ज्वाब। ५ चंचि। ६ करि जानौं। ७ मन्ने। ८ देय। ९ सुरजन तवै। १० देखो। ११ हूहि। १२ बित्यौ। १३ छंडि। १४ बीतौ; रित्तौ, बित्तौ अंत्यानु- प्रास। १५ बत्त। ✳ कहो देउँ सेख महि मागु न बीत्यौ। CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

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