हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें११६ • हम्मीररासो अब¹ दिल्ली कौ कूँच² साहि कौ तुरत कराऊँ। तुम राजो रणथंभ जुद्ध मैं सकल सिराऊँ ॥ हम्मीर राव हँसि यौं³ कहै⁴ सदा कोन॒ जग थिरि रहै। छिन⁵ भंग अंग लालच कहा सुजस एक⁶ जुगजुग रहै ॥६५८॥ दोहरा छंद अल्लादीन पतिसाह सौं, गही⁷ खग्ग⁸ करि टेक । दुख मैं बिरले मित्त⁹ हैं, सुख मैं मित्त अनेक ॥ ६५९ ॥ हठ तौ राव हमीर को, औ¹⁰ रावण की टेक। सत राजा हरिचंद को, अर्जुन बाण अनेक ॥ ६६० ॥ गही टेक छाड़ै नहीं, जाभ चौंच करि जाय । मीठो¹¹ कहा अँगार कौ, ताहिं चकोर चुगाय¹² ॥ ६६१॥ छप्पय छंद सब¹³ बातैं यह कही सेख अपनै घर आयौ। भई¹⁴ राति सुरजन्न निकट हजरति कै आयौ¹⁵ ॥ हाथ¹⁶ जोरि सिर नाय कह्यौ छल राव भुलायौ । द्वादस कै सामानँ रक्खि गढ़ तोरि हलायौ ॥ ये¹⁷ कहिय बात¹⁸ सुर्जन सकल रणत भँवरटूट्यौ¹⁹ अबै। हजरति प्रताप महा बंक गढ़ सहल भयौ²⁰ सद्कै सबै ॥६६२॥ दोहरा छंद चंदकला देवलि कँवरि²¹, पारसि महिमा साह। माँगत साह अलावदी, अबै लै मिल्यौ आय²² ॥६६३॥ १ अबै दिली। २ कुच्च। ३ इमि। ४ कह्यौ। ५ क्षण। ६ इक। ७ गहिय। ८ तेग। ६ मीत जुग। १० अरु। ११ मिठ्ठौ। १२ जु खाय। १३ राव बात (बत्त) ये (इमि) कहिय सेख अप्पन घर आयव (आयउ)। १४ भइय रत्ति। १५ धायौ। १६ हथ्थ। १७ यह। १८ बत्त। १६ टुट्यौ। २० लयौ। २१ कुँमरि। २२ साय, आय अंत्यानुप्रास। CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri