भारतकोश
हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

पृष्ठ 201, कुल 258 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 201

हम्मीररासो ११५ चौपाई छंद कहैँ राव हँसि सुरजन सुनिजै । मिलो छाड़ि¹ पन² यह न गुनिजै ॥ सुनि कापुरुप कपूत अयानै । छाड़ि³ टेक को⁴ छत्री जानै ॥६५३॥ फिर हमीर सुज्जन सों पूछी⁵ । तेरी बात लगत मुहिं झूछी⁶ ॥ जौँरा भौँरा खास सु दोई । कैसे निबरै जानत सोई ॥६५४॥ कहै साह यह तो हैँ⁷ छानी । प्रगट देखि निज नैनन जानी ॥ पाथर⁸ डारि खास मैं जोई९ । सुनिए श्रवण सद्द१० सब कोई ॥६५५॥ दोहरा छंद पाथर¹¹डारयौ खास महँ, खुड़क्यौ चाँम¹२अपार¹३ । जिस सब्द¹४ नीचै रही, राव यहै¹५ निरधार ॥ ६५६ ॥ खुड़क्यो¹६ सुनि दुव¹७ खास को, चढ़यौ सोच उर राव । तब महिमा हम्मीर सों, कहै बचन गहि पाँव ॥ ६५७ ॥ छप्पय छंद कहै¹⁸ जु महिमा सेख राव मुहिं हुकुम सु दीजै१९ । मिलो साह कौ जाय फिकर इतनो नहिं कीजै२० ॥ १ छंडि । १२ प्रन । ३ छंडि । ४ नहिं । ५ पुच्छी । ६ छुच्छी । ७ नहिं । ८ पत्थर । ६ सोई । १० सब्द । ११ पत्थर । १२ चर्म्म । १३ अधार । १४ सबै । १५ येह । १६ खुड़को । १७ दोउ । १८ कह महिमा तब सेख । १६ दिज्जै, दिजिय । २० किज्जै, किजिय । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri