हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहम्मीररासो ११५ चौपाई छंद कहैँ राव हँसि सुरजन सुनिजै । मिलो छाड़ि¹ पन² यह न गुनिजै ॥ सुनि कापुरुप कपूत अयानै । छाड़ि³ टेक को⁴ छत्री जानै ॥६५३॥ फिर हमीर सुज्जन सों पूछी⁵ । तेरी बात लगत मुहिं झूछी⁶ ॥ जौँरा भौँरा खास सु दोई । कैसे निबरै जानत सोई ॥६५४॥ कहै साह यह तो हैँ⁷ छानी । प्रगट देखि निज नैनन जानी ॥ पाथर⁸ डारि खास मैं जोई९ । सुनिए श्रवण सद्द१० सब कोई ॥६५५॥ दोहरा छंद पाथर¹¹डारयौ खास महँ, खुड़क्यौ चाँम¹२अपार¹३ । जिस सब्द¹४ नीचै रही, राव यहै¹५ निरधार ॥ ६५६ ॥ खुड़क्यो¹६ सुनि दुव¹७ खास को, चढ़यौ सोच उर राव । तब महिमा हम्मीर सों, कहै बचन गहि पाँव ॥ ६५७ ॥ छप्पय छंद कहै¹⁸ जु महिमा सेख राव मुहिं हुकुम सु दीजै१९ । मिलो साह कौ जाय फिकर इतनो नहिं कीजै२० ॥ १ छंडि । १२ प्रन । ३ छंडि । ४ नहिं । ५ पुच्छी । ६ छुच्छी । ७ नहिं । ८ पत्थर । ६ सोई । १० सब्द । ११ पत्थर । १२ चर्म्म । १३ अधार । १४ सबै । १५ येह । १६ खुड़को । १७ दोउ । १८ कह महिमा तब सेख । १६ दिज्जै, दिजिय । २० किज्जै, किजिय । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri