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हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

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११४ हम्मीररासो वह$^१$ महिमा बर बीर राव का हुकम जु पावै ॥ गहै तुम्हें ततकाल पाँव लंगर गहि मेलै : उसै दिल्ली बैठाय जोर मरजात सु-पेलै । हठ छाड़ि साहि रणथंभ का करो कूच चालिये दिली । जै रही राव हम्मीर की पतिसाही मारी गिली ।६४६॥ तब$^२$ सु साह हठ छाड़ि उलटि दिल्ली दिस आए । पिता बैर करि याद साह सुरजन पछिताए ॥ रतन पंच लै संग$^३$ साह कै पाँव सु लग्यौ । तात बैर हिय जानि कोप उर मैं अति जग्यौ ॥ कर जोरि साह सुरजन कहै सुगम दुग्ग मो हथ्थ गनि । यह जितो राज$^४$ रणधीर को मोहिं दैन की बाच भनि ।६४७॥ दोहरा छंद हँसि हजरत ऐसे कही$^५$, सुरजन आगे$^६$ आव । दियौ राज रणधीर कौं, करूँ बड़ा उमराव ॥६४८॥ करि सलाँम सुरजन तबै, बीरा खायौ कोपि । आप$^७$ भवन हिकमति रची, स्वामि धर्म्म सब लोपि ॥६४९॥ जौरा भौंरा खास में$^८$, भरे जु कोरे चाँम । फजणि आनि हाजरि भयौ, सुरजव करी$^९$ सलाँम ॥६५०॥ हाथ$^{१०}$ जोरि हम्मीर सों, सुरजन कही सुजाँन । मिलो राव पतिसाह सों, गढ़ बीत्यौ$^{११}$ सामाँन ॥६५१॥ बिनती$^{१२}$ सुनत$^{१३}$ हमीर तब, कियौ कोपि रत नैन । छंडि टेक छत्री तनी, रे कपूत गनि$^{१४}$ ऐन ॥६५२॥ १ यह । २ तब अलाउदी छंडि हठ दिल्ली दिसि आए । ३ भेंट । ४ राव हम्मीर को । ५ कहै । ६ अगु, अग्गै । ७ आय । ८ द्वै । ९ किय । १० हथ्थ । ११ बित्यौ । १२ विनति । १३ सुनि । १४ गति । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri