हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहम्मीररासो ११३ महिमा साहि हमीर सैं, कही बात कर जोर । सकल साह कै हसम मैं, है लघु भैया मोर ॥६४०॥ नहिं दूजो कोड साह कै, सबरे १ दल मैं और । मीर गभरू अनुज मम, जामैं इतनो जोर ॥६४१॥ छप्पय छंद नाहिं जती बिन जोग सूर बिन तेग २ न होई । इते साह कै संग मीर सरभर नहिं कोई ॥ करो हुकम मोहि राव साह कौ हनौँ ततच्छिन । मिटै सकल उतपात भाज सत्रु सेन जाय बिन ३॥ हँसि कही राव हम्मीर तब यह खुदाय दूजो दुनी। सिर बचै साह छत्र जु उड़ै यह कौतुक कीजे गुनी ॥६४२॥ करि ४ साहिब कौ याद सीस हम्मीरहिं नायौ । कियौ हुक्म तब ५ राव कोपि कै बाँन ६ चलायौ । अनल ७ पंख मनु परिय टूटि ८ आकास धरन्निय ९ । भयौ सोर बर सद्द पर्यौ महि छत्र बरन्निय १०॥ मुरझाय साह भू मैं परे ११ उड्यौ छत्र आकास दिस । तब कही उजीर पतसाह सौं तजी ज्याँन परिहरि सु रिस ॥६४३॥ पिछले निमक १२ की दोस्ती, करी जाँन बकसीस । जो दूजो सर छंदिहै, हनिहै १३ बिस्वा बीस ॥६४४॥ जा गढ मैं महिमा रहै, किम आवै वह हथ्थ । अहि ज्यूँ गही छहूँदरी, यौं हजरत की गथ्थ ॥६४५॥ छप्पय छंद कह महरम खाँ बात इसी १४ हजरति सुनि आवै । १ सिगरे । २ तेज । ३ धन । ४ करि जगदीसहिं याद; इष्टदेव निज सुमिरि । ५ हम्मीर । ६ परसु । ७ अनिल । ८ द्विट्टि । ६ वरन्निय । १० धरन्निय । ११ भुम्मी गिर्य्यड । १२ निमष । १२ हनै जु । १४ इती । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri