हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
पृष्ठ 206, कुल 258 में से
संदर्भ में पढ़ें१२० हम्मीररासो आसा कहै हमीर सोँ, अब चूको मति सोहि ॥ ६८१ ॥ बिछुरन मिलन सँजोग जग, सब मैं यह बिधि सोह । आसा कहै हमीर सह, हम तुम भया बिछोह ॥ ६८२ ॥ धन्य बंस जिहिं जन्म तब, राव सराहत तांहिं । और कौन तुम बिन त्रिया, बचन कहै समुझाय ॥ ६८३ ॥ धन्नि पतिव्रता नारि तू, राव सराहत आप । अवर कौन तुम बिन त्रिया, कहै बचन बिन पाप ॥ ६८४ ॥ राखि सेख सरणौ तजौं, कुल लाजै चहुवाण । तुम साकौ गढ़१ कीजियौ२, निरखि साह नीसाण ॥ ६८५ ॥ लीन३ परिक्षा बहुत मैं, तू छत्री कुलवाल । तुव४ मत मैं देख्यौ५ सुदृढ़, यही बात६ यहि काल ॥ ६८६ ॥ सुने राव कै बचन तब, परी धरनि७ मुरझाय । निठुर बचन मुख तैं जु कहि, तजि रणबास रिसाय ॥ ६८७ ॥ हम पतिबरता पुरुष बिन, कौन दिसा चित कौ धरैं । आसा कहै हमीर सोँ, तुम पहला साकौ करैं ॥ ६८८ ॥ छप्पय छंद खोलि सकल भंडार तुरत८ जाचिक सु बुलाए९ । बिप्र भली विध पूजि१० दिये वंदी मन भाए ॥ भवन तिरिया११ गढ़ मॉम तजे हम्मीर मोह बिन । मन क्रम बचन सु त्यागि भए निज धर्म्म लीन खिन ॥ ततकाल राव रणबास तजि सभा आय दरबार किय । छाये जु मित्र१२ मंत्री सु बुध सूर बीर आदर सुदिय ॥ ६८६ ॥ कहै राव हम्मीर सुणो चतुरंग महा बर । १ गढ़ मैं करौ । २ किज्जियौ । ३ लिन्न । ४ तुममन । ५ दिख्यौ । ६ बत्त । ७ भुम्मि मुज्झाय । ८ सर्व्व, सव्व । ६ बुल्लाए । १० पुज्य । ११ त्रिया । १२ मंत्र । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri