हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
DevanagariHindipublished258 पृष्ठ
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हम्मीररासो १२१ तुम्हें रतन की लाज जुद्ध१ हम करें नियम करि ॥ तुम सब बात समर्थ२ करो जैसी तुम भावै । रणतभँवर३को लोग तहाँ कछु दुःख न दुख नहिं, पावैं ॥ गढ़ सजो जाय चित्तोड़४ को प्रजापालि सुख दिज्जिये । सब साँम दाँम दंडह सहित भेद नित्य५सब किज्जिये ॥ ६९० ॥ कहत तबै६ चतुरंग उचित७ यह हम कौं नाहीं । आप८ रहो हम९ रहें लरैं हम जस कै ताहीं ॥ कहे राव यह प्रजा सकल चित्तोड़१० समावै । यह परिकर सब जितो राखि११आपन१२ जु सुहावै ॥ चतुरंग राव ले रतन कौं गढ़ चित्तोड़१३ सुचल्लिये । प्रथम जाय अल्हण सुपुर करुणाजुत डेरा किये ॥ ६९१ ॥ दोहरा छंद पंच सहस चतुरंग लै, चले१४ रतन कै साथ । तब हमीर दरबार किय, कही सबन यह गाथ१५ ॥ ६९२ ॥ जीवै सो घर भुगिवै१६, जुझझे१७ सुरपुर वास । दोऊ जस कित्तो१८ अमर, तजो मोह जग आस ॥ ६९३ ॥ जीवन चाहत जो कोऊ, ते सुखैन घर जाहु । कहै राव सबकें सुनत, हम सँग मरन उछाह ॥ ६९४ ॥ छप्पय छंद सुनत बचन ये सेख भवन अपने कौ आए१९ । कुटम२० सेख करि खेस करद लै अद्दल पठाए ॥
१ युद्ध । २ समर्थ । ३ यह परिकर सब जितौ, राखि आपन जु . सुहावै । ४ चीतोड़ । ५ नीति । ६ तब्ब । ७ उदित । ८ अप्प । ६ सब । १० चीतोड़ । ११ रक्खि । १२ अप्पन । १३ चीतोड़ । १४ चलिय, चल्ल्यउ । १५ सत्य, गत्थ, अंत्यानुप्रास । १६ भोगिवै । १७ जूझे । १८ कीरति । १६ कै धायौ । २० कुटम खेसि सब सेख । १६ CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri