हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२० हम्मीररासो कहै राव सों बचन नैन जल सों भरि आए । सुख संपति रणथंभ त्यागि करिये मन भाए ॥ सुर नर कायर १ सूरमा कहै सेख थिर नहिं कोइ । हम्मीर राव चहुवाँन २ अब करै साहि सों जंग सोइ ॥ ६९५ ॥ दोहरा छंद जीवन कौ सब कोउ कहैं, मरन कहै नहिं कोय । सती सूरमा पुरुष को ३, सरतहिं संगल होय ॥ ६९६ ॥ छप्पय छंद केसर सौंधै बसन सकल उमरावन सज्जै । अलादीन पतिस्याह फेरि कहि कब कब गज्जै ॥ सहस गऊ करि दाँन राव सिर मौर सु बंध्यौ । करथब ४ जुद्ध को साज छत्र कुल सुजस सु संध्यौ ॥ निस्साँन ५ पाँन बज्जे सु घन हर्ष ६ बीर बानै पड़े । चहुवाँन राव हम्मीर तब जुद्ध काज चौरै चढ़े ७ ॥ ६९७ ॥ दोहरा छंद पंच सहस रतनेस सँग, गढ़ चीतोड़ ८ पठाय । पंच सहस रणथंभ गढ़, दृढ़ रावत रहू आय ॥ ६९८ ॥ असी सहस सेना सकल, चढ़ी राव कै संग । माया मोह बिरक्त मन, जुरन साह सों जंग ॥ ६९९ ॥ छप्पय छंद कमध्वज कूरम गोड़ तँवर परिहार ९ अमानो । पौरच बैस पुँडीर बीर चहुवाँन सु जानो ॥ जइव ६ गोहिल धीर चढ़े गहिलोत गरूरं । १ कातर । २ पतिसाह सों करो जंग अद्भुत सोइ । ३ कै । ६ करिव । ४ नीसाँन । ५ हरषि । ६ कढ़े । ७ चित्तोड़ । ८ पड़िहार । ६ जादम । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri