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हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

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पृष्ठ 209

हम्मीररासो १२३ सैंगर और पँवार भिझ १ इक भोज मरूरं ॥ छत्तीस वंस छत्री चढ़े जिम पावस बहल बढ़े । हम्मीर २ राव चहुवाँन तब जंग कज्ज ३ चौरै कढ़े ॥ ७०० ॥ जेठ मास बुधबार सप्तमिय पक्ख ४ अँध्यारी । करि सूरज कौ नमन राव कर खग्ग ५ सम्हारी ॥ हरषे सुर तेंतीस और हरषे जु कपाली । नारद सारद हरषि वीर बावन जुत काली ॥ हरषी जु हरषि ६ अच्छर ७ हरषि ८ जुग्गिन बृंद सु नच्चियव । जंबुक कराल गिद्धनि हरषि सूर हरषि हिय रच्चियव ॥७०१॥ हनूफाल छंद सजि सूर राव हमीर । बिरदाय ९ बीर सु धीर ॥ जनु छत्र कुल को लाज । रन सिंधु की मनु पाज ॥ ७०२ ॥ दातार सूर सु अंग । निस द्यौस जुट्टत जंग ॥ धरि स्वामि धर्म्म सुरंग । वढ़ि १० रहै तिल तिल अंग ॥ ७०३ ॥ गढ़ कोट औटत एक । तोरंत करि करि टेक ॥ सिर खौरि चंदन सोह । रवि वंदि चंदि सुलोह ॥ ७०४ ॥ गति उद्ध ११ कुद्दत भट्ठ । ज्योँ १२ खेलन उतरे नट्ठ ॥ अँग बर्म्म चर्म्म सु कीन । सिर टोप औप सु दीन १३ ॥ ७०५ ॥ दस्ताँन रचि सु हत्थ । करि चहै गत्थ १४ अकत्थ १५ ॥ बहु न्हान दाँन सु कीन । गो स्वर्ण विप्रन दीन १६ ॥ ७०६ ॥ रबि संभु विष्णु सुपुज्जि १७ । मन साह सैं करि दुज्जि १८ ॥ १ भोल । २ दल हरषि राव हम्मीर कै साह जीव अचरिज बढ़े । ३ काज । ४ पाख । ५ तेग । ६ हूर । ७ अच्छरि । ८ सकल । ९ रन । बिरदार । १० रहिव । ११ उर्घ । १२ जिम खेल खिल्लिउ । १३ किन्न, दिन्न अंत्यानुप्रास । १४ गत्थ । १५ अगत्थ । १६ किन्न, दिन्न अंत्यानुप्रास । १७ पूजि । १८ दूजि । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri