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हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

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पृष्ठ 223

हम्मीररासो १३७ यहीं सेस सीसं, रह्यौ मैं जु दीसं । करो सत्य वाचं, ततो आप साचं ॥८१३॥ तबै णतसाहं, खुरासाँन नाहं । करे¹ कोप पिल्लं, तहाँ सेख मिल्लं ॥८१४॥ कहै साह बैनं, सुनो सर्व सैनं² । गहै सेख ल्यावै, इतो हस्म पावै ॥८१५॥ जु बारा हजारं, मनं³ सव्व भारं । नोन्नति निसाँनं, अरु तेग माँनं ॥८१६॥ सुने बैन ऐसे, खुरासाँन रेमे । हजारं सतं स, निवाए⁴ सु सीसं ॥८१७॥ सदक्की जवाँनं, पिले सेख प.नं । तबै सेख धाए, राव कौ सीस नाए ॥८१८॥ दोहरा छंद करि सलाँम हम्मीर कौं, सेख लई बड़ बग्ग । दुहूँ⁵ सेन देखत⁶ नयन, रिस करि कढ्ढे⁷ खग्ग ॥८१९॥ चौपाई छंद कहे साहि सुनि सदक़ी बैनं । यह कुट्टन⁸ कौ गहो सु ऐनं ॥ जीवत पकरि याहिं अब लीजै⁹ । मनसव द्वादस सहस करीजै१० ॥८२०॥ सहकि¹¹ संग मीर खुरसानी । तीस सहस चढ़ि चले अमानी ॥ गहन सेख महिमा कै काजै । १ करी कुप्पि । २ एनं । ३ मनो । ४ नमाए । ५ दोउ । ६ दिक्खत, पिक्खत । ७ कड्डिय, कढ्ढे । ८ कुट्टम । ६ लिजिंय । १० करिजिय, झुकिजिय । ११ सदकी । CC0 Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri ९४