हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहम्मीररासो १३६ तेज राज धन धाँम तात तिय हठ. नहिं छंडे । राखि १ धर्म्म दृढ़ सत्य कीर्ति जस जुग जुग मंडे ॥ अरि नीर नैन महिमा कहै अब जननी कब जन्म दे । जब मिलों राव हम्मीर तुम बहुरि समै हैंहै कदे ॥८२६॥ कहै राव हम्मीर धीर नहिं हीन उचारो । सुर न करें सनेह देह छिन भंग बिचारो ॥ बिछुरन मिलन संजोग आदि ऐसी चलि आई । ज्यों जीवन २ त्यों मरन सकल ३ वेदन यह ४ गाई ॥ कीजे ५ न भम ६ अनभंग चित मिलैं सूर कै लाक सब । हम तुम जु साह बहुरों ७ तथा होहि एक ८ तन तजि सुअब ॥८२७॥ तज्जथ स्व.रथ लोभ माह काहू नहिं करिये । देह घरे परऑँन ९ स्वामि का १० कारज सरिए ॥ को इतसों ले जात कहा उतसों ले आयौ । रहे अमर कीरत्ति पाप नरदेह सु गायौ ॥ सुनि सेख देख थिर नाहि कछु तन मट्टी मिलि जाइये । का सोच मरन जीवन तना यह लाभ सुजस सों पाइये ॥८२८॥ सुनि हमीर कै बचन साह पर सनमुख धाए । मीर गाभरू बीर आँनि तिन ११ सास नवाए ॥ अलादीन पतिसाह इतै सिर ऊपरि १२ राजै । तुम सिर राव हमीर स्वामि आपन १३ कुल लाजै ॥ नन तजो नोन की सरत दोउ यह तन तिल तिल खंडिये । मिलिये जु भिस्ति १४ मैं जाय अब धर्म न अपना छाडये ॥८२९॥ हँसि अलावदी साह सेख कौ बचन सुनाए १५ । १ रखि । २ ज्यामन, जाँमन । ३ चऊ । ४ मैं, बिधि । ५ किज्जे । ६ भंग । ७ गवरु, गमह । ८ इकक । ६ परमाँन । १० जो । ११ रिस । १२ उप्पर । १३ अप्पनि । १४ बिहस्त । १५ सुणांए । ·CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri