हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४० हम्मीररासो दिली छाड़ि करि सीस बहुरि मुझकौ नहिं¹ नाए॥ मिलो मुझे तजि रोस हुरम मैं तुमकौ दीनी। अर गौरखपुर देस देहुँ तुम कौ सत चीन्ही²॥ मुसकाय साहि महिमा कहै³ बचन यादि वै किजिये। जननी जनमे फिरि आनि भव जबै मिलन गन लिजिये॥८३०॥ दोहरा छंद जब⁴ जननी जनमै बहुड़ि, धरूँ देह कहुँ आनि । तऊ न तजौं हमीर संग, सत्य बचन मम जानि ॥८३१॥ तब सु राव•हम्मीर सुनि, कीनी⁵ मदति सु सेख। हजगति महिमा साह कौ, बात लगावत देखि । ८३२॥ कहै हमीर यह बचन पर, गही साह सौं तेग⁶ । लोभ न करिये⁷ जीव का, गहो⁸ साह सो बेग ॥८३३॥ चौपाई छंद कहै मीर गभरू ये बातैं । गहे⁹ सार नहिं करिये घातैं ॥ हुकम धनी कै कौ प्रतिपालो । आइ अदङ्गि सीस पर चालो१० ॥८३४॥ सुनि गभरू कै बचन सुभाए । महिमा फूलि खेत मैं आए ॥ सनमुख सार सम्हाय सु बढ़ढ़ै । माया¹¹ मोह त्यागि खग कढ़ढ़ै ॥८३५॥ ———————————————————————————————— १ न नवाए। २ अरु गौरखपुर औधि देस दीनो (दिन्नो) सति चीन्हीं (चिन्हीं) । ३ कही । ४ अब । ५ कीन्ही । ६ टेक। ७ किजिय । ८ तो रहै हमारी टेक । ६ गहौ सार रन कौ रचि घातैं । १० प्रतिपालहु, भालहु अत्यानुप्रास । ११ महिमा । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri