भारतकोश
हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

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१४२ हम्मीररासो दल दोय दिक्खत बीर । पहुँचे बिहस्त गहीर ॥८४५॥ दोहरा छंद तिल तिल भे १ अँग दोहुँन कै, हने बाजि गजराज । हजरत राव हमीर कै, सबै सँवारे काज ॥ ८४६ ॥ मुसलमाँन हिंदवाँन २ कौ, चले सेख सिर नाय । चढ़ि बिमाँन दोऊ तहाँ, बिहस्त पहुँचे जाय ॥८४७॥ छप्पय छंद कहै साह मुख बचन ३ सुनो हम्मीर महाबल । अब न गहो तुम सार फिरै हम सकल दिली दल ॥ तुम्हैं माफ तकसीर राज रणथंभ करो थिर । हम तुम बीच कुराँन मुहिम नहिं करो दिलीसुर ॥ परगनें पाँच ४ दीन्हें अवर रणतभँवर भुगतो सदा । जब लग सुराज हमरो रहै तुम सु राज राजो तदा ॥ ८४८॥ चौपाई छंद कहै राव हम्मीर सु बानी । सुनि दिल्लीस सत्य जिय जानी ॥ जाकी अदति होय किमि मिट्टै । नर तैं होनहार किमि घट्टै ॥ ८४९ ॥ तुम्हरो दयो राज किन पायौ । तुम्ह कौ राज कहो किन धायौ ॥ बेर बेर कहा मुखै ५ उचारो । कोटि म्याँनपन क्यों न बिचारो ॥८५० ॥ कीरति अमर , अमर नहिं कोई । १ भए अंग । २ हितवाँन । ३ बच्न, बैन । ४ पंच दिन्निय । ५ मुख्ख । CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri