हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहम्मीररासो १६३ तब सुसाह तजि संग बचन हजरत को लीनौ ॥ सेतबंद पर जाय पूजि रामेस्वर नीकै । परे सिधु मैं जाय करे मन भाते जी कै ॥ उर्वसी साह हम्मीर नृप सेख मीर सब नाक गय । करि लोकपाल आदर अखिल जय जय जय हम्मीर कय ॥१६५॥ मिले स्वर्ग मैं जाय साह हम्मीर हरक्खे । महिमा मीररु बाल विविध मिलि सुमन बरक्खे ॥ जय जय जय हम्मीर सकल देवन मुख गाए । लोक अमर कीरत्ति मुक्ति परलोक सुपाए ॥ माणिक्य¹ राव चहुवाँन कुल दैन खङ्ग² दोऊ³ धरत । कहि जोधराज यह बंस मैं ननकारी नहिंन करत ॥१६६॥ दोहरा छंद सुनत राव हम्मीर जस, प्रीति सहित नृप चंद । मनसा बाचा कर्मना, हरे जोध कै द्वंद ॥१६७॥ चंद्र नाग बसु पंच गिनि, संवत माधव मास । सुक्ल सु त्रतिया जीव जुत, ता दिन ग्रंथ प्रकास ॥१६८॥ भूपति नीवागढ प्रगट, चन्द्रभाँन चहुवाँन । साँम दाँम अरु भेद जुत, दंडहिं करत खलाँन ॥१६९॥ इति श्रीमन्महाराजाधिराज-राजराजेंद्र-श्रीमदखिल-चाहुवाँन- कुल-तिलक नीमराना-अधिपति श्रीमहाराजा चंद्र- भाँनजी-देवाज्ञया कवि जोधराज विर- चितं यवनेश अलावद्दीन प्रति हम्मीरयुद्धं समाप्तम् ॐ मुमुक्षु भवन वेदान्त पुस्तकालय ॐ १ माणक्य। २ खग्ग । ३ उद्धरत । आगत क्रभा... 0026........ CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri दिनांक...