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हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

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( १८ ) किया था; आज भी अगर तुम दोनों राजकुमारों को पकड़ लोगे तो मेरी अत्यंत प्रसन्नता के पात्र होगे। इस प्रकार समझा-बुझाकर उस दिन के युद्ध के लिये अलाउद्दीन ने मीर जमाल को सेनानायक बनाया। इधर से दोनों राजकुमार केसरिया बाना पहिने, सीस पर मुकुट, हाथों में रणकंकण बाँधे अपने अपने तेज तुरंगों पर सवार सोलह हजार राजपूतों की सेना के बीच में ऐसे भले मालूम देते थे मानों रणबाँकुरे देवताओं के दल में इंद्र और कुबेर सुशोभित हो रहे हों। दोनों वीर सेना सहित उज्ज्वल नेजे और खड्ग चमकाते हुए मुसलमान सेना में इस प्रकार धँस पड़े जैसे काले काले बादलों में बिजली विलीन हो जाती है। इधर अलाउद्दीन से उत्तेजित किए हुए यवन-दल ने उन राजकुमारों को घेर लिया और जमाल खाँ बड़े वेग से उन दोनों राजकुमारों पर टूटा। वे वीर राजकुमार भी बड़ी धीरता से उसका सामना करने लगे। यह देखकर राव हम्मीर जी ने वीर शंखोदर को कुमारों की सहायता के लिये भेजा। इसपर इधर से अरबी फौज का धावा हुआ। राजपूत और मुसल- मान सेना में इस प्रकार विकट मार होने लगी कि किसी को अपना बिगाना न सूझता था। इसी समय जमाल खाँ ने अपना हाथी राजकुमारों के सामने बढ़ाया। तब कुमार ने तलवार का ऐसा हाथ मारा कि एक ही हाथ में लोहे का टोप कटते हुए मीर जमाल की खोपड़ी के दो टूक हो गए। जमाल खाँ को गिरता देखकर वालन खाँ ने धावा किया। इधर से वीर शंखोदर ने बढ़कर उसका मुख रोका। निदान सायंकाल तक बराबर लोहा झरता रहा। दोनों कुमार अपनी समस्त सेना के सहित स्वर्गगामी हुए। इस युद्ध में मुसलमानी फौज के ७५००० योद्धा खेत रहे। इस प्रकार दोनों राजकुमारों के मारे जाने पर राव रणधीर ने क्रोधित होकर किले पर से आग बरसाना आरंभ कर दिया। तब बादशाह ने कहला भेजा कि आप क्यों जान-बूझकर जान देने पर उतारू हुए हैं, आपके लड़कर मर जाने से इस झगड़े का अंत न