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हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

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( १९ )

होगा। यदि आप राव हम्मीर जी को समझाकर मीर महिमा को मेरे पास भेजवा दें तो आप वा राव हम्मीर जी दोनों सुख से राज्य करें और हम दिल्ली चले जायँ। किंतु बादशाह के पत्र का राव रणधीर ने केवल यही उत्तर दिया कि क्षत्रियों का यह धर्म नहीं है कि विषय-सुख-भोग की लालसा अथवा मृत्यु के डर से वे अपने धारण किए हुए धर्म को त्याग दें। राव रणधीर की ओर से इस प्रकार कोरा उत्तर पाकर अलाउद्दीन ने अपनी फौज को भी छाड़ के किले पर आक्रमण करने की आज्ञा दी। अलाउद्दीन की आज्ञा पाते ही मुसलमानी फौज ने टिड्डी दल की तरह उमड़कर किले को चारों ओर से घेर लिया और वे किले पर से चलते हुए गोले, गोली, बाण बर्छों की विषम बौछार की कुछ भी परवाह न करके किले पर चढ़ दौड़े। मुसलमानी सेना जब किले में धंस पड़ी तब राजपूत लोग सर्वथा प्राण का मोह छोड़कर तलवार से काम लेने लगे। दोनों में अग्न्यास्त्रों का संचालन बिल्कुल बंद हो गया। केवल तबल, तलवार, बरछी, कटार, सेल से काम लिया जाने लगा। इसी रेलापेल में बादशाह के निज पेशकार (बगली) ने राव हम्मीर की तलवार के सामने आने की हिम्मत की किंतु वीर रणधीर के एक ही वार में उसके जीवन का वारा न्यारा हो गया, इसलिये उसके सहकारी रूमी सर्दार ने अपने ५० बलवान् योद्धाओं सहित रणधीर जी को घेर लिया। राव रणधीर ने इन पचासों सिपाहियों को मारकर रूमी सर्दार को भी दो टूक कर दिया। इसी प्रकार मार काट होते हुए राव रणधीर सहित जितने राजपूत वीर उस किले में थे सबके सब मारे गए और छाड़- गढ़ का किला बादशाह के हाथ आया। इस युद्ध में शाही फौज के दो बड़े बड़े सर्दार और एक लाख रूमी सैनिक खेत रहे और राव रणधीर के साथी ३०००० राजपूत काम आए। यह छाड़गढ़ का अंतिम युद्ध चैत्र सुदी ९ शनिवार को हुआ। बीस हजार केवल राजपूत मारे गए और एक हजार राजपूती स्त्रियाँ स्वयं जलकर भस्म हो गईं।