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हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

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पृष्ठ 71

( ५७ ) में लिखा है कि कि हम्मीर का जन्म विक्रम संवत् ११४१ शाके १००८ में हुआ। साथ ही यह भी लिखा है कि अलाउद्दीन का जन्म भी इसी दिन हुआ। इस हिसाब से हम्मीर और अलाउद्दीन का जन्म १०८४ ई० में हुआ। पर अन्य ऐतिहासिक ग्रंथों से यह बात ठीक नहीं जान पड़ती। हम्मीर महाकाव्य में हम्मीर के गद्दी पर बैठने का संवत् १३३० (सन् १२८३ ई०) दिया है। यह ठीक जान पड़ता है। फिर हम्मीर महाकाव्य में लिखा है कि चौहानराज की मृत्यु उनके राज्य के अठारहवें वर्ष में अर्थात् संवत् १३४८ (सन् १३०१ ई०) में हुई। अमोर खुशक की तारीख आलांई में यह तिथि तीसरी जीलकदः ७०० हिजरी (जुलाई १३०१ ई०) दी है। मुसलमानी इतिहासों से विदित है कि सन् १२९६ में सुलतान अलाउद्दीन मुहम्मदशाह अपने चाचा जलालुद्दीन फीरोज- शाह को मारकर गद्दी पर बैठा, और सन् १३१६ ई० तक राज्य करता रहा। इस अवस्था में हम्मीररासो में दिए हुए संवत् ठीक नहीं हो सकते। कदाचित् यहाँ यह कह देना भी अनुचित न होगा कि हम्मीररासो में हम्मीर की जो जन्म कुंडली दी है वह भी ठीक नहीं है। दूसरी बात जो इस काव्य के संबंध में विचार करने की है वह यह है कि हम्मीर की अलाउद्दीन से लड़ाई क्यों हुई। हम्मीररासो तथा ऐसे ही अन्य हिंदी काव्यों में मीर महिमाशाह की रक्षा के लिये युद्ध का होना लिखा गया है और इसमे कोई संदेह नहीं कि इस अद्भुत कथा से हम्मीर का गौरव बहुत कुछ बढ़ जाता है और कथा में भी एक अद्भुत रस का संचार हो आता है। पर हम्मीर महाकाव्य में इसका कहीं नाम भी नहीं है और न कहीं किसी पुराने इतिहास में इसका वर्णन मिलता है। पर महिमाशाह का हम्मीर के यहाँ रहना निश्चित है तथा उसके अपने बाल बच्चों को मारकर लड़ाई में हम्मीर का साथ देने की बात भी ठीक है। यह अवस्था तभी हो सकती है जब महिमाशाह अपने को हम्मीर का किसी बड़े उपकार के लिये ऋणी मानता हो। अलाउद्दीन का साथ न देकर हम्मीर का