हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)
Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense
कवि जोधराज द्वारा
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इन हम्मीर के विषय में विशेष कुछ लिखना अथवा इनके
संबंध की घटनाओं पर विचार करना मैं आवश्यक नहीं समझता ।
एक तो इनका इस रासो काव्य से कोई संबंध नहीं है, दूसरे यह
भूमिका योंही इतनी बड़ी हो गई है कि अब इसे और बढ़ाना अनु-
चित जान पड़ता है। केवल कथाभाग मैंने इसलिये दे दिया है कि
जिसमें पाठकों को इसके जानने का यहीं अवसर प्राप्त हो जाय और
वे स्वयं इसके विषय में और जानने का उद्योग करें। जिन महाशयों
को हम्मीर के विषय में कुछ लिखने का अवसर प्राप्त हो उन्हें उचित
है कि वे दोनों हम्मीरों को अलग अलग मानकर उनके संबंध की
घटनाओं का उल्लेख करें।
बस अब मुझे हिंदी के प्रेमियों से क्षमा माँगनी है कि एक तो
इस भूमिका के लिखने में इतना विलंब हो गया, दूसरे यह भूमिका
इतनी बड़ी हो गई । आशा है कि पहले अपराध का मार्जन दूसरे
से हो जाय ।
इस भूमिका को समाप्त करने के पहले मैं कुँवर कन्हैया जू और
पंडित रामचंद्र शुक्ल को अनेक धन्यवाद देना चाहता हूँ जिन्होंने
इसके कई अंशों के लिखने में मुझे बड़ी सहायता दी। साथ ही मैं
कुँअर कृष्णसिंह वर्मा को भी धन्यवाद दिए बिना नहीं रह सकता।
उन्हीं के द्वारा मुझे यह काव्य प्राप्त हुआ । ठाकुर विजयसिंह जी ने
इस काव्य को प्राप्त करने और कुँवर कृष्णसिंह जी की सहायता
करने में जो कष्ट उठाया उसके लिये मैं उनका भी उपकार मानता
हूँ। आशा है कि ये सब महाशय इसी प्रकार मुझपर कृपा बनाए
रहेंगे जिससे मैं अन्य अन्य ऐसे काव्यों के संपादन करने में
समर्थ होऊँ ।
काशी,
६ फरवरी १६०८ \quad } \qquad\qquad\qquad\qquadश्यामसुंदर दास