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हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

हम्मीर रासो (कवि जोधराज - रणथम्भौर हम्मीर देव का शरणागत धर्म एवं शौर्य इतिहास)

Hammir Raso of Jodhraj on Ranthambore Defense

कवि जोधराज द्वारा

DevanagariHindipublished258 पृष्ठ

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पृष्ठ 89

हम्मीररासो ३ ऋषि अत्रि गोत्र मैं जन्म मानि ॥ ९ ॥ डिडवरिया राव कहि बिरद ताहिं । सुभ राठ देस मैं उदित आहि ॥ तिहिं नाँम गाँम भल बीजवार । सब प्रजा सुखी जुत बरण च्यार ॥ १० ॥ जहाँ बालकृष्ण सुत जोधराज । गुन जोतिष पंडित कवि समाज¹ ॥ नृप करी कृपा तिहिं पर अपार । धन धरा बाजि² गृह बसन सार ॥११॥ बाहन अनेक सत्कार भूरि । सब भाँति अजाची कियौ मूरि ॥ नृप एक³ समय दरबार माहिं । रासो हमीर कहि⁴ सुन्यौ नाहिं ॥१२॥ नृप प्रस्न⁵ करिय यहु उभे बात । सब कहो बंस उत्पति सुतात । अरु कहो साहि हम्मीर बैर । किहिं भाँति⁶ कंक= बड्ढ्यौ सु फेर ॥१३॥ तब कही प्रथम यह कल्प आदि । जल सेष सैन जब है अनादि ॥ नहिं धरणि चंद्र सूरज अकास । नहिं देव दनुज नर बर प्रकास ॥१४॥ सब बीज बृक्ष⁷ हरि संग मेलि । करि आप जोग निद्रा सकेलि ॥ करि सैन अंत निज सक्ति जानि । १ उदार । २ बास । ३ इक । ४ कह्यौ । ५ प्रश्न । ६ बत्त । ७ जुक्त । =कंक=ससिश्रु ।