भारतकोश
हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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पृष्ठ 130

(९८) हारीतसंहिता । [ प्रथमस्थाने- अथ केलेके फलका गुण । हृद्यं मनोज्ञं कफवृद्धिकारि शान्तं च सन्तर्पणमेव बल्यम् ॥ रक्तं सपित्तं श्वसनं च दाहं रम्भाफलं हन्ति सदा नराणाम् ॥ २३ ॥ संग्राह्यपक्वं किल शीतलं च कषायकं वातकफं करोति ॥ विष्ट- म्भि बल्यं गुरु दुर्जरं च आरण्यरम्भाफलमेव तद्वत् ॥ २४ ॥ पकाहुआ केलेका फल हृदयको हित है, मनोहर है, कफको बढ़ाता है, शांतिको करता है, तृप्तिको करता है, बलमें हित है और रक्तपित्त, श्वासदोग, दाह इनको सबकालमें नाशता है ॥ २३॥ नहीं पका हुआ केलेका फल कब्जको करता है, शीतल है, कसैला है, वातको और कफको करता है, विष्टंभी है, बलमें हित है, भारी है, दुर्जर है और वनके केलेका फल भी इन्ही गुणोंवाला है ॥ २४ ॥ अथ कैथाका गुण । कपित्थकाम्लं मधुरं कषायं विषेधं गुरु ॥ कासातिसारहृद्रो- गच्छर्द्यामयकफापहम् ॥ २५॥ कपित्थं मधुरं शीतं कषायं ग्राहकं लघु ॥ २६ ॥ कैथा फलका आमचूर खट्टा है, मधुर है, कसैला हैं, दस्त बन्द करता है, भारी है और खांसी, अतीसार, हृद्रोग, छर्दि, और कफरोग, इनको नाशता है ॥ २५ ॥ कैथा मधुर है, शीतल है, कसैला है, कब्जको करता है और हलका है ॥ २६ ॥ अथ खजूरिया अथवा छुहारेका गुण । अपक्वं खर्जूरफलं त्रिदोषशमनं मतम् ॥ पक्वमेव हितं श्रेष्ठं त्रिदोषशमनं परम् ॥ २७ ॥ नहीं पका हुआ खजूरिया अथवा छुहारा त्रिदोषको शांत करता है और पका हुआ हितकर श्रेष्ठ है और निश्चय त्रिदोषकों शांत करता है ॥ २७ ॥ अथ सुपारीका गुण । कषायमधुरं भेदि पूगं पित्तकफापहम् ॥ २८ ॥ सुपारीका फल कसैला है, मधुर है, मलको पतला करता है, पित्तको और कफको नाशता है ॥ २८ ॥ अथ नागरपानका गुण । नागवल्लीदलं हृद्यं सुगन्धि कफवातजित् ॥ २९॥ नागरपान हृदयको हितकर है, सुगंधवाला है, कफको और वातको जीतता है ॥ २९ ॥ १ विषेण सीदत्यवसादं करोत्युदरस्येति ।